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अस्थाई गौशाला: अव्यवस्था की भरमार, सांसत में मवेशी

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ज्ञानपुर। किसानों की लहलहाती फसलों को बचाने के लिए जिले में बनीं अस्थायी गोशालाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। अव्यवस्थाओं से अस्थायी गोशालाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चारा, पानी के अभाव में मवेशियों के जान पर सांसत आ गई है। कई मवेशी बीमार होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं लेकिन संचालकों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
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सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद गो तस्करी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इससे गांवों में मवेशियों की बाढ़ सी आ गई। नीलगाय से अधिक किसानों का नुकसान छुट्टा मवेशी करने लगे। प्रदेश भर में आए संकट को देखते हुए शासन ने अस्थायी गोशाला बना कर ऐसे मवेशियों को संरक्षित करने का निर्देश दिया। जिले के चकवां, डुड़वाधरमपुरी, औराई चीनी मिल समेत सात स्थानों पर अस्थायी गोशालाएं खोली गईं। कुछ माह पूर्व चारा, पानी समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए ब्लॉकवार पांच अस्थायी गोशालाओं को पांच-पांच लाख रुपये आवंटित किए गए, जबकि पिपरिस के लिए 10 लाख भेजा गया, लेकिन खामियों के चलते गोशालाओं पर तमाम अव्यवस्थाएं कायम हैं। औराई में खाली पड़ी चीनी मिल में बनी अस्थायी गौशाला में करीब 400 मवेशी हैं। इसी तरह दूसरी गौशालाओं में भी 200 से लेकर 300 मवेशी हैं। अस्थायी गौशालाओं में नांद, चन्नी, पेयजल की सुविधा संग साफ-सफाई का निर्देश दिया गया है लेकिन संचालक मनमानी ढंग से संचालन करते हैं। चारा आदि लाने के बाद ऐसे खुले में फेंक देते हैं, जिससे आधा चारा पशु खाते हैं तो आधा उनके पैरों से नष्ट हो जाता है। ताकतवर मवेशी तो भोजन कर लेते हैं लेकिन कमजोर मवेशी चारे के लिए ही तरस जाते हैं। एक, दो दिन नहीं बल्कि हर रोज का यही हाल होता है। तीन दिन की बारिश के बाद साफ-सफाई न होने से अस्थाई गौशालाओं में गंदगी फैल गई है। इससे कई मवेशी बीमार हो गए हैं। औराई चीनी मिल, चकवां, डुड़वा धरमपुरी समेत अन्य गौशालाओं में 50 से अधिक मवेशी बीमार होकर मरणासन्न हालत में पहुंच गए हैं। समय रहते उनकी देखरेख नहीं की गई तो वे मर सकते हैं। सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि अस्थायी गौशाला में ब्लॉकवार आवंटित राशि 35 लाख भेजी गई है। किसी अस्थायी गौशाला को अधिक पैसे की जरूरत है तो बीडीओ, प्रधान और सेक्रेटरी प्रस्ताव बनाकर दें तो दिया जाए।
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