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झमाझम बारिश ने बिगाड़ा खेल,जलनिकासी व्यवस्था रही फेल

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ज्ञानपुर। 24 घंटे की लगातार बारिश ने कालीन नगरी में भारी तबाही मचाई। दर्जनों हरे पेड़ जड़ से उखड़ कर धराशायी हो गए और कई कच्चे मकान जमींदोज हो गए। निचले इलाकों से लेकर सरकारी कार्यालयों के परिसर तक घुटने तक जलभराव हो गया। इससे सामान्य जनजीवन बेपटरी हो गया। इससे बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
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बुधवार को तड़के शुरू हुई झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कागजों पर हुई जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत सामने आ गई। बारिश की जद में आकर दर्जन भर से अधिक कच्चे-पक्के मकानों के गिरने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सिर छिपाने की चिंता बढ़ गई। विभिन्न लिंक और संपर्क मार्गों पर पेड़ों के गिरने का क्रम जारी रहने से यातायात व्यवस्था पंगु बनी रही। गत तीन दिनों से जनपद में बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर जारी था। बुधवार की सुबह से शुरू हुई बृहस्पतिवार सुबह तक जारी रही। 24 घंटे से अधिक की लगातार बारिश से हर तरफ पानी ही पानी हो गया। जलनिकासी व्यवस्था फेल हो जाने से बस्तियां जलमग्न हो गईं। तटवर्ती क्षेत्र कोनिया के दर्जनों गांवों में भारी जलभराव हो जाने से लोग सड़कों की ओर रुख करने को विवश हो गए। पश्चिमी छोर के दरवांसी, सूफीनगर, ऊंज, कुरमैचा, गोधना, मैलौना, सुधवैं, जंगीगंज, सेमराध, सरायजगदीश, रामकिशुनपुर-बसहीं, मुंगरहां, सुभाषनगर, नवधन, कलापुर, दौरियाहीं, त्रिभुवनपुर, घमहापुर आदि गांवों को जोड़ने वाले मार्ग भी जलमग्न रहे। इसी तरह पूर्वी छोर के जंगीगंज, कौलापुर, चकमानधाता, गोपालापुर, गेराई, गोपीगंज नगर, रामपुर कायस्थान, खमरिया, औराई, लालानगर आदि गांवों में पानी का जमाव लोगों के लिए परेशानी का सबब बना रहा। उत्तरी क्षेत्र के चौरी बाजार, दरुनहां, सुरियावां नगर, पाली, अभोली, दुर्गागंज, कुढ़वां समेत दर्जनों गांवों की स्थिति नारकीय बनी रही। जहां लोगों में नाला-नालियों की सफाई न कराए जाने को लेकर रोष देखा गया।
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