बुधवार को एआरटीओ कार्यालय के हुए स्टींग में यह बातें खुलकर सामने आई। आम आदमी बनकर पहुंचे रिपोर्टर को देखते ही चार बिचौलिए पाए आए, क्या काम है भईया, बताइए तुरंत करवा देंगे। रिपोर्टर ने कहा एक डीएल बनवाना है, वह व्यक्ति मुंबई में है, कैसे बनेगा। उन्हे यहां आने की जरुरत नहीं है, आधार कार्ड, डिजिटल हस्ताक्षर करके भेज दें। मोबाईल पर ओटीपी जाएगी, उसे बता दें। इसके बाद तुरंत लर्निंग मिल जाएगा। एक महीने बाद डीएल मिलेगा। छह महीने में एक बार आकर एआरटीओ कार्यालय के डीएल काउंटर पर फोटो खिंचवानी होगी।
डीएल बनाने के लिए सरकारी शुक्ल 1000 रुपये हैं। इसमें 350 रुपये लर्निंग और 750 रुपय डीएल शुल्क है। लर्निंग के लिए सहज जन सेवा केंद्र पर आनलाइन आवेदन करना होगा। वहीं डीएल का शुल्क एआरटीओ कार्यालय में जमा करना पड़ता है। बिचौलिए 900 से 1200 रुपये लर्निंग शुल्क लेते हैं। वहीं डीएल का 1600 से लेकर 2600 रुपये तक वसूलते हैं।
बिना टेस्ट दिए ही डीएल बनाने का अलग-अलग रेट है। फिटनेश ऑनलाइन होता है। जिसमें बस व ट्रक का 800 से 1000 रुपये शुल्क है। छोटी वाहन का 600 रुपये हैं। वहीं एआरटीओ कार्यालय में बिचौलियों के चक्कर में पड़ने के बाद एक हजार से 1400 रुपये अतरिक्त वसूला जाता है। यहां रोजाना औसतन 15 से 20 ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं, लेकिन नौ से 10 डीएल बिना ट्रक पर टेस्ट दिए ही बन जाते हैं। अमर उजाला की पड़ताल के दौरान यह पोल खुली है।
केस 1 - बीते शुक्रवार को डीएल बनाने के लिए एआरटीओ दफ्तर गया। बाइक पार्क करके गेट पर पहुंचा, चार लोग पास में पहुंच गए। पूछे काम क्या है, बताने पर हर कोई अपनी ओर खिचने लगे। बिचौलियों ने कहा कि बिना टेस्ट की ही डीएल बन जाएगा। - जितेंद्र मिश्रा, ज्ञानपुर, बालीपुर।
केस 2- कोई भी काम कराने एआरटीओ दफ्तर जाने पर बिना दलालों के काम होना असंभव है। अधिकारी दस दिन दौड़ाते हैं, वहीं दलाल के साथ जाइए तो सारा काम दो दिन में हो जाता है। मैं फिटनेस की जानकारी लेने आया था। जहां मुझे बिचौलियों को ही पकड़ना पड़ा और अब तक काम भी नहीं हुआ है। - विनय सरोज, मोढ़।
कोई भी व्यक्ति बिचौलियों के चक्कर में न पड़े। सीधे अधिकारी व कर्मचारी से मिले। काम कराने के लिए सीधे काऊंटर पर जाए। यदि किसी को कही परेशानी है। सीधे हमसे संपर्क करें। कार्यालय में बिचौलियों की इंट्री बंद है। इसके बाद भी अगर ऐसा है तो जांच कराई जाएगी और बिचौलियों पर केस दर्ज भी कराएंगे। - राम सिंह, एआरटीओ भदोही।