फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधूरी व्यवस्था के बीच गौशालाओं की हालत खराब

विज्ञापन
विज्ञापन
ेखी से परिसरों में भरा पानी
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। योगी सरकार का शुरुआती पशु प्रेम यथार्थ के धरातल पर नहीं दिख रहा। मातहतों ने पशुओं के संरक्षण की सरकार की मंशा का बंटाधार कर दिया है। यही वजह है कि तमाम प्रयास के बाद भी छुट्टा पशुओं का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। अस्थायी गोशालाओं में भी पशुओं की सुरक्षा राम भरोसे ही है। अब तक कई मवेशियों की जान चली गई है। जनपद के छह ब्लाक क्षेत्रों में संचालित 17 बेसहारा पशु संरक्षण गृहों के हालात बद से बदतर होकर रह गए हैं। भारी बारिश के कारण संचालकों की अनदेखी से जहां संरक्षण गृहों में पानी भर जाने से हालत बिगड़ गए हैं, वहीं उचि त देखभाल न हो पाने से पशुओं के मरने का भी सिलसिला जारी हो चुका है।
बताते चलें कि ज्ञानपुर ब्लॉक में चार, भदोही में पांच, अभोली में तीन, औराई में एक और सुरियावां में एक और डीघ में दो संरक्षण गृहों के नाम पर अब तक पशुपालन विभाग लगभग एक करोड़ 15 लाख रुपये की धनराशि पानी की तरह बहा दिया, लेकिन व्यवस्थाएं मानक पर खरा नहीं उतर सकीं। जनपद में गत तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कुछेक गौशालाओं में अभी तक छाजन आदि की मुकम्मल व्यवस्था न हो पाने से पशु भीगकर बीमार हो जा रहे हैं। कस्तूरीपुर, भानीपुर और आनंदडीह की बात करें तो बेमानी ही होगी। उपचार और देखभाल के लिए संरक्षण समिति भी बराबर मॉनीटरिंग तो कर रहा है, लेकिन अव्यवस्थाओं के आगे वह भी लाचार साबि त हो रहा है। लोगों की नजर पड़ते ही यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि जब भाजपा सरकार की घोषणाओं के बाद भी छुट्टा पशुओं के हालात नहीं सुधर पा रहे हैं तो अन्य सरकारों में सोचना नासमझी ही होगी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लेकर गौशालाओं का बराबर निरीक्षण कराया जा रहा है। राम का पुरा-चकवा की गोशाला में एक पशु के मृत होने की जानकारी मिली है। तीन अन्य पशुओं की हालत खराब होने पर पूरी टीम उपचार में लगी रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीन माह में नहीं बन सका छाजन
मोढ़। विकास खंड सुरियावां के कस्तूरीपुर में चार जून से शुरू हुई गोशाला में तीन माह बाद भी छाजन न बन पाने से पशु खुले में ही रह रहे हैं। ग्राम प्रधान चंद्रशेखर यादव ने बताया कि चौदहवें वित्त से ढाई लाख खर्च हुआ है और पशुपालन विभाग से अब तक मात्र एक लाख 90 ही मिल पाया है। 20 पशुओं के लिए कटीले तार से परिसर को घेर कर गेट का निर्माण और खड़ंजा का कार्य करा दिया गया है। भूसा और चन्नी घर, पंप घर के अलावा पानी पीने के लिए हौद भी तैयार है। शासन से निर्धारित प्रतिदिन का 30 कम पड़ रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें