ज्ञानपुर। जिले में एक दर्जन से अधिक पशु अस्पतालों की हालत दयनीय होने से कर्मचारी भी आना छोड़ दिए हैं। धूप और गर्मी में बढ़ी मौसमी बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए पशुपालक अप्रशिक्षित पैरावेट और झोलाछाप के हाथों आर्थिक शोषण का दंश झेल रहे हैं।
पशु पालक राजमणि, प्रभुनारायण, कालीचरण आदि ने बताया कि मौसम में प्रतिदिन उतार-चढ़ाव होने से पशुओं को बुखार, मुंह से लार टपकने आदि संबंधी बीमारियां हो रही हैं। रोगों के इलाज के लिए जब अस्पतालों पर पहुंचते हैं तो वहां न चिकित्सक मिलते हैं और न ही फार्मासिस्ट। महामारी में अभी तक एक भी अस्पताल को सैनिटाइज नहीं कराया जा सका है। इससे आस-पास फैली गंदगी, परिसर के अंदर भवनों के जीर्ण-शीर्ण होने, जंगली घासों की भरमार के कारण स्थिति खराब हो गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.जय सिंह ने बताया कि महामारी को देखते हुए अस्पतालों में कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को चिह्नित कराकर सख्ती की जाएगी। साफ-सफाई के लिए निर्देश दिए जाएंगे।