आरोप लगाया कि विभागीय लापरवाही से एक साल से अधिक का मानदेय नहीं मिल पा रहा है। दो माह पूर्व मानदेय आ चुका है लेकिन देने में हीलाहवाली की जा रही है।
डीएम के आश्वासन पर अनुदेशकों ने प्रदर्शन खत्म किया।
श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए विशेष बाल श्रमिक विद्यालय संचालित किए गए थे। मई 2014 में विद्यालय बंद हो गए लेकिन उसमें पढ़ाने वाले 175 अनुदेशक, लिपिकों का करीब एक साल से मानदेय नहीं मिला।
शासन की ओर से दो महीने पूर्व मानदेय भी आ गया लेकिन उनको अब तक नहीं दिया गया। कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मानदेय नहीं मिलने पर बुधवार को काफी संख्या में अनुदेशकों ने कलेक्ट्रेट पर विरोध जताया।
कहा कि मंत्रालय की ओर से उन्हें समायोजन करने के लिए पत्र आया है लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है। अनुदेशकों ने डीएम से समस्या को अवगत कराया।
डीएम ने सीडीओ और एसडीएम ज्ञानपुर को निर्देश दिया कि वार्ता कर दो दिन के अंदर मानदेय दिलाएं। डीएम के आश्वासन पर अनुदेशकों ने विरोध समाप्त किया। प्रदर्शन करने वालों में संतोष सरोज, दिनेश कुमार बिंद, बीएल सरोज, रवींद्र प्रसाद पांडेय, राजन कुमार पाल, सुमंत कुमार मिश्र, विद्या मोनवाल, सलीम आदि मौजूद रहे।