ग्राम पंचायतों में प्रकाश की व्यवस्था होने से पूर्व ही खेल शुरू हो गया है। एजेंसियों के मकड़जाल में फंसे ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी सोलर लाइट लगने से पहले ही एजेंसियों का भुगतान भी कर दिया है। अस्सी फीसदी से अधिक प्रधानों ने भुगतान कर दिया लेकिन कुछेक प्रधानों ने चेक काटने से मना कर दिया। विरोध करने वाले प्रधानों ने एजेंसियों पर मनमानी पैसा लेने का आरोप लगाया।
पंचायत चुनाव के बाद करीब आठ से नौ माह तक 56 करोड़ रुपये राज्य वित्त और 14वां वित्त में डंप पड़ा था। जिलाधिकारी सुरेश कुमार सिंह की मेहनत से कार्ययोजना को स्वीकृति मिली। स्वीकृत मिलते ही कार्ययोजना में शामिल ग्राम पंचायतों में प्रकाश व्यवस्था में गड़बड़ी शुरू हो गया। सोलर लाइट लगवाने के लिए वाराणसी, जौनपुर, इलाहाबाद से कई एजेंसियों ने जिले में डेरा डाल दिया। प्रशासनिक उदासीनता से एजेंसिया भी सत्तापक्ष के माननीय की कृपा से ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचातय अधिकारियों से मनमानी चेक कटवा रहे हैं। डीघ, अभोली और ज्ञानपुर विकास खंड के काफी संख्या में ग्राम प्रधान चेक भी काट चुके हैं। गिने-चुने ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी एजेंसियों के मनमानी का विरोध कर रहे हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सत्ता के गलियारों तक पकड़ रखने वाले एजेंसियों के खिलाफ न तो कोई सख्ती बरती जा रही है और न ही कोई कार्रवाई हो रही है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्रधानों ने आरोप लगाया कि 11 से 12 हजार की सोलर लाइट का 22 हजार तक भुगतान किया जा रहा है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक करेंगे।
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अब सबमर्सिबल पंप पर नजर
ज्ञानपुर। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर बूथों पर लगने वाले सबमर्सिबल पंप पर भी काम कराने वाली एजेंसियां नजर गड़ाए हुए हैं। सूत्रों की माने तो जिले के बूथों में लगने वाले सबमर्सिबल पंप का काम जौनपुर की एक फर्म को दिया गया है। एजेंसियों के कोटेशन में हैंडपंपो में लगने वाले पंप कीमत 45 हजार तक रखा गया है जबकि वास्तविक कुछ अलग ही है।
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ग्राम सभाओं में लगने वाले सोलर लाइट की कीमत एजेंसिया तय कर सकती हैं। कहीं से अभी तक गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच कराया जाएगा।
रमेश चंद्र पांडेय, सीडीओ भदोही