दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से भदोही लौटे 11 बांग्लादेशी समेत 18 जमातियों की विवेचना के बाद रिमांड बन गई है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण उन्हें लॉकडाउन के बाद जिला कारागार भेजा जाएगा। पुलिस विवेचना में रेड कार्पेट का असर दिखा। संरक्षणदाताओं का नाम हटनेेेे से पूरी जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
जिले के नौ थानों में भदोही और गोपीगंज किसी न किसी कारनामे को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच भदोही कोतवाली सवालों में घिरती जा रही है। माहभर पूर्व दिल्ली के तब्लीगी मरकज से लौटने के बाद गेस्ट हाउस में छिपे 11 बांग्लादेशी मो. इंसेर अली, त्वाहिदुल इस्लाम परवेज, सैयद मोहिबुर्रहमान, नजरूल हक, नवाज अली, नजरूल इस्लाम, दराज्जुद्दीन मुतब्बर, रफिकुल इस्लाम, फैजल रैबी, शेख अख्तरुज्जमा, मनौवर रसीद, जमात अली, शहिदुल्ला, अनवर हुसैन समेत 18 जमातियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
उसके बाद उन्हें कलेक्ट्रेट स्थित अस्थायी जेल में भेजा गया। मामले में संरक्षणदाताओं अब्दुल अयूब अंसारी, अब्दुल रब अंसारी, हाजी अलीम उल्लाह, मुस्ताक अहमद, अब्दुल रहीम, मुनौव्वर के नाम मुकदमा दर्ज था, हालांकि विवेचना में सभी को क्लीनचिट दे दी गई।
पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह ने कहा कि रिमांड बन गई है लेकिन कोरोना के मद्देनजर अभी अस्थायी जेल में ही रखा जाएगा। अपरिहार्य स्थिति न बनी तो लॉकडाउन के बाद सभी जेल जाएंगे।