ज्ञानपुर जिला अस्पताल का एक्सरे कक्ष। संवाद
ज्ञानपुर। जनपद सृजन के 32 साल बाद भी दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाला महराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में डिजिटल एक्सरे की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इससे मरीजों को एक्सरे कराने के लिए निजी लैब या पांच किमी दूर सरतपहां स्थित सौ शय्या अस्पताल जाना पड़ता है। एक डिजिटल एक्सरे कराने में मरीजों को निजी लैब में 250 से 300 रुपये खर्च करना पड़ता है। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 700 से 800 की ओपीडी होती है। इसमें 60 से 65 केस हड्डी के आते हैं। इसमें से अधिकांश मरीज को एक्सरे की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में मैनुअल एक्सरे मशीन है, लेकिन उससे साफ तस्वीर नहीं आ पाती। जिससे चिकित्सकों को डिजिटल एक्सरे कराना पड़ता है।
डिजिटल की व्यवस्था न होने के कारण 15 से 20 मरीज प्रतिदिन निजी लैब जाते हैं। जहां उनको 250 से 300 रुपये एक्सरे कराने पर खर्च करना पड़ता है। जिला अस्पताल से 100 बेड अस्पताल आने-जाने में करीब 10 किमी है। यहां से एक्सरे कराने में पूरा दिन बीत जाता हैं। मरीज, तीमारदार दूसरे दिन डॉक्टर को दिखाने आते हैं। इससे अधिकतर मरीज निजी लैब में जाकर ही एक्सरे कराते हैं। वाराणसी से कटकर 1994 में भदोही जिला बना, इसके बाद से यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को निरंतर विस्तार होता गया। लेकिन जिला अस्पताल में एक डिजिटल एक्सरे की मशीन नहीं लग सकी। इसके लिए जनप्रतिनिधियों ने भी कभी प्रयास नहीं किया। यही हाल सुरियावां सीएचसी का है, जहां आठ साल बाद भी डिजिटल एक्सरे मशीन इंस्टाल नहीं हो सकी है। यहां मशीन रखे रखे खराब हो गई। अब दूसरी मशीन लगाई जाएगी।
जिला अस्पताल में मैनुअल एक्सरे की व्यवस्था है। जहां मरीजों का एक्सरे नियमित की जाती है। सौ शय्या अस्पताल में डिजिटल एक्सरे है। जो नियमित संचालित हो रहा है। जल्द ही जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे के लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही