काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को वनस्पति विज्ञान
विभाग में नीलहरित शैवालयुक्त जैविक खाद विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला
आयोजित की गई। इस मौके पर नीलहरित शैवाल युक्त जैविक खाद (बायोफर्टलाइजर)का
प्रदर्शन और इस्तेमाल से पौधों को होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी
गई। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुमन गुप्ता के संयोजन के आयोजित कार्यशाला में
स्नातकोत्तर के छात्रों ने भी योगदान किया।
एडआन कोर्स श्रृंखला की
कार्यशाला में रासायनिक खाद की अपेक्षा जैविक खाद के इस्तेमाल पर जोर दिया
गया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि बीजीए युक्त जैविद खाद न केवल मिट्टी की
उर्वरक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि रसायनिक खाद की अपेक्षा कम से कम 80 से
90 फीसदी तक फसलों का पैदावार भी बढ़ाने में मदद करता है।
मुख्य अतिथि
प्राचीन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्र प्रकाश ने बायोटेक्नोलॉजी के
क्षेत्र में जैविक खाद को बहुत उपयोगी बताया। उन्होंने छात्रों का उत्साह
बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की प्राकृतिक नील हरित शैवालयुक्त जैविक खाद के
उपयोग से पौधों में लगने वाले कई तरह के फफूंद रोगो से बचावहोती है।
वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पीएन डोंगरे ने कहा कि इकोफ्रेंडली वातावरण को बनाए रखने में इनकी बहुत ही सकारात्मक उपयोगिता है। विभाग
के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने जैविक खाद इस्ते माल के
विधि पर प्रकाश डाला। कहा कि हमारे गरीब किसानों के लिए यह हर तरह से
उपयोगी है।
कार्यक्रम में धन्यवाद भी ज्ञापित किया। इस मौके
पर डॉ. सौम्या मिश्रा, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, रेनू यादव,
ज्योति भारती, शिप्रा श्रीवास्तव, मनोज पाल आदि रहे।