ज्ञानपुर। लगभग पांच दशक से ककराही-गोपीगंज में संचालित हो रही मंडी समिति के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना चार सालों से लटकी हुई है। 50 लाख की इस कार्य योजना को शासन की अनुमति का इंतजार है। नव निर्माण के अभाव में परिसर स्थित आवासीय कक्ष और क्षतिग्रस्त चहारदीवारी दम तोड़ रहे हैं।
मंडी परिषद बाहरी क्षेत्रों से आलू, फल, अन्न का आहरण कर पंजीकृत थोक व्यापारियों को व्यापार कराया जाता है। रबी, खरीफ सीजन में धान, गेहूं की खरीदारी समर्थन मूल्य पर शुरु होते ही निजी क्षेत्र की कार्यदायी संस्थाएं शासन से निर्धारित मंडी शुल्क देकर किसानों की ऊपज को खरीदती हैँ। इन सबके बावजूद परिसर में दर्जनों की संख्या में आवासीय कक्ष का रखरखाव न हो सका है। रखरखाव व मरम्मत के अभाव में परिसर स्थित भवन खंडहर होते जा रहे है। यहां अराजकतत्वों का डेरा भी बना रहता है। यहां आने वाले आढ़तियों समेत दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले व्यापारी भी समस्याओं से दो-चार होते रहते हैँ। बीते चार सालों से मंडी परिषद के जीर्णोद्धार को लेकर कार्ययोजना भेजी गई है, लेकिन अब तक उसकी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने पर ही मंडी परिषद का नवीनीकरण हो सकेगा। मंडल अभियंता वीके राय ने बताया कि पूर्व में कार्यरत रहे अधिकारियों की तकनीकी टीम ने जो भी कार्य योजनाएं तय किया था। उसकी स्वीकृति अब तक हो जाना चाहिए था। मंडी समिति का निरीक्षण कर रिमाइंडर शासन को भेज दिया जाएगा।