गोपीगंज। गलियों में ही नहीं अब तो छुट्टा पशु भी हाईवे के बीच सड़क पर अपना आशियाना बना लिया। दिन हो या रात किसी भी समय झुंड के झुंड में इन्हें देखा जा सकता है। इसके चलते दिन की तुलना में रात के समय हादसे ज्यादा हो रहे हैं। हादसों में पशुओं के साथ ही इंसानों को भी जान गंवाना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है लेकिन प्रशासनिक अफसरों में उदासीनता के कारण इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हाईवे के साथ ही मुख्य मार्गों को पशुओं का डेरा बनने से रोक दिया जाए तो काफी हद तक हादसों को रोका जा सकता है।
जिले में गोवंश संरक्षण के नाम पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों पर पशुओं का डेरा है। गोशाला से ज्यादा पशु तो सड़कों पर कभी भी देखे जा सकते हैं। बाबूसराय, महाराजगंज, औराई, घोसिया, लालानगर टोलप्लाजा, गोपीगंज, कौलापुर, जंगीगंज बाजार, सूफीनगर-गोधना तिराहा, वहिदानगर, कुरमैचा, नवधन और पश्चिमी छोर की अंतिम सीमा ऊंज तक के क्षेत्र में अब तक कई हादसे छुट्टा पशुओं के कारण हो चुके हैं। छुट्टा पशुओं को संरक्षण गृह पहुंचाने के लिए बनी संरक्षण समिति, नगर पालिका, नगर पंचायत, पशुपालन विभाग की उदासीनता पर सवाल दर सवाल छोड़ रहे हैं। गत दिनों संरक्षण समिति के साथ पशुपालन विभाग ने अभियान चलाकर राजमार्ग पर चक्रमण करने वाले पशुओं को संरक्षण गृह तक पहुंचाने की पहल ठंडे बस्ते डाल दी गई है।
इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि जिले में दो दर्जन से अधिक संरक्षण गृह में 3500 छुट्टा पशु हैं। लेकिन इससे ज्यादा संख्या में छुट्टा पशु राजमार्ग से लेकर खेत खलिहानों में कभी भी देखे जा सकते हैं। गोपीगंज नगर के हालात पर गौर किया जाय तो मिर्जापुर रोड तिराहा, मिर्जापुर मार्ग, पड़ाव-ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन मार्ग, गिराई-कठौता तिराहा पर इनकी चहलकदमी से कभी भी बड़े हादसे हो सकते हैं। सभासद नरेंद्र दुबे, जितेंद्र गुप्ता, अश्वनी कुमार अग्रवाल आदि ने जिला प्रशासन से राजमार्ग पर अड्डा जमा चुके छुट्टा पशुओं को पुन:अभियान चलाकर संरक्षण गृहों में भेजवाने की मांग की है।
कान्हा गौशाला निर्माण पर लगा ग्रहण
ज्ञानपुर। प्रदेश की भाजपा सरकार छुट्टा पशु संरक्षण के नाम पर भले ही कुबेर का खजाना खोल दिया हो लेकिन जिला स्तरीय अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। लाखों रुपयेसे बनने वाले कान्हा गोशाला की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद भदोही को मिली है बावजूद इसके एक वर्ष का समय व्यतीत होने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। यही स्थिति बैदाखास में निर्माणाधीन गोशाला के अधर में लटक जाने से नगरीय क्षेत्रों में भ्रमण करने वाले पशुओं से लोग परेशान हैं। डीघ क्षेत्र के दरवांसी गांव में प्रस्तावित गोशाला के लिए अभी तक सदर तहसील प्रशासन जमीन को चिह्नित करने तक की प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर सका है। प्रभारी सीवीओ डॉ.जेडी सिंह ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के लिए नगर प्रशासन को गोशाला बनवाकर पशुओं को संरक्षण देने के लिए कहा जा चुका है। कान्हा और बैदाखास में बनने वाले गोशाला का निरीक्षण किया जाएगा और दरवांसी गांव के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।