ज्ञानपुर। जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की हकीकत देखने निकलीं जिला कार्यक्रम अधिकारी को गड़बड़ी ही गड़बड़ी मिली। मामले को संज्ञान में लेते हुए तीन सुपरवाइजरों का वेतन और आठ कार्यकत्रियों का मानदेय रोक दिया। निरीक्षण में पांच आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिलने पर संबंधित कार्यकत्रियों की नौकरी समाप्त करने की संस्तुति कर दी।
महिला एवं बाल पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चोें और धात्रियों को कुपोषण से दूर रखने के लिए पोषाहार दिया जाता है। शासन के निर्देश के विपरीत अधिसंख्य केंद्रों पर पोषाहार न देने की शिकायत उठती रहती थी। सोमवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी नीलम मेहता ने ज्ञानपुर ब्लाक के अकोढ़ा प्रथम और द्वितीय आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रथम केंद्र बंद पाया गया जबकि द्वितीय पर अभिलेख सही नहीं मिले। इस पर उन्होंने मुख्य सेविका का वेतन रोकते हुए कार्यकत्रियों का मानदेय बाधित कर दिया गया। इसी तरह बैरीपरवा प्रथम और द्वितीय केंद्र पर भी अभिलेख नहीं प्रस्तुत करने पर कार्यकत्रियों का मानदेय बाधित कर दिया गया। मंगलवार को डीपीओ ने नेवादा और रोही के आंगनबाड़ी केंद्रों को चेक किया तो यहां पर कार्यकत्रियां अभिलेख नहीं प्रस्तुत कर सकीं। सुरियावां ब्लाक के हरिहरपुर प्रथम द्वितीय, सांडा और मर्दनशाहपुर आंगनबाड़ी केंद्र निरीक्षण के दौरान बंद पाए गए। कार्यकत्रियों का मानदेय बाधित करते हुए सुपरवाइजर का वेतन रोक दिया गया। डीपीओ नीलम मेहता ने कहा कि निरीक्षण के दौरान पांच केंद्र बंद मिले। बंद मिलने वाले केंद्रों की कार्यकत्रियों की नौकरी समाप्त करने के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए निरीक्षण किया जा रहा है। जिन-जिन केंद्रों पर गड़बड़ी मिलेगी, सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।