भदोही। लगभग पांच वर्ष से मंदी की मार झेल रहे कालीन निर्यातकों के लिए इंडिया कारपेट एक्सपो किसी सौगात से कम नहीं होती। यह फेयर हस्तनिर्मित कालीन उत्पादकों के उत्पादों के प्रदर्शन के लिए नायाब प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है। इसके लिए जिले के निर्यातक नए उत्पादों को अंतिम टच देने में लगे हुए हैं।
एक जमाना था हैंडनाटेड कालीनों का। महंगे होने के बावजूद हैंडनाटेड कालीनों की ही मांग अधिक होती थी। आज जमाना बदल चुका है। लोगों को सस्ता भी चाहिए और बढ़िया भी। मांग देखते हुए कालीन निर्यातकों का झुकाव भी सस्ते कालीनों की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि कालीन मेलों में हैंडनाटेड कालीनों का प्रदर्शन लगातार फीका होता जा रहा है। सीईपीसी के प्रशासनिक समिति के सदस्य, उमेश कुमार गुप्त कहते हैं कि उनके पास सिल्क, विस्कोस, प्लेन एंबास्ड, शैगी, मलाई डोरी, हैंडलूम तथा नेपाली में व्यापक वेरायटी है।
उन्होंने कहा कि जर्मनी ने युवा आयातकों ने जब से कारोबार संभाला है तब से पुरी दुनिया का झुकाव सस्ते कालीनों की ओर बढ़ा है। उसी ढर्रे पर हमें भी चलना पड़ रहा है। हम आने वाली नई पीढ़ी को यही बताने का प्रयास कर रहे हैं। श्री गुप्ता के युवा बेटे रोहित गुप्ता ने कहा कि फेयर से पूरी तरह आशान्वित हैं। हालांकि भदोही की सड़कों की दशा थोड़ा कचोटती जरूर है क्योंकि उसी पर पूरा व्यापार टिका है।