ज्ञानपुर। जनपद के ऐतिहासिक ज्ञानसरोवर के निर्मलीकरण का संकल्प लेकर 13 माह से लगातार श्रमदान कर रहे श्रमदानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता से साल में सौ घंटे स्वच्छता के लिए मांगे थे, लेकिन यहां के श्रमदानी आठ सौ घंटे से भी अधिक का समय सरोवर की सफाई में श्रमदान में दे चुके हैं।
जिला मुख्यालय ज्ञानपुर में प्राचीन बाबा हरिहरनाथ मंदिर से सटा ज्ञानसरोवर की दशा देखरेख के अभाव में दयनीय हो गई थी। ज्ञानपुर विकास मंच ने करीब एक दशक पूर्व इसकी सफाई का बीड़ा उठाया। वर्तमान में नगर पंचायत के चेयरमैन हीरालाल मौर्य ने 13 माह पूर्व बिना प्रशासनिक सहयोग के श्रमदान के माध्यम से निर्मलीकरण करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्हाेंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अनवरत सरोवर से मलबा निकालने का कार्य जारी रखा।
चेयरमैन हीरालाल मौर्य ने बताया कि एलकेजी से लेकर एलएलबी तक के छात्र श्रमदान में हिस्सा लेकर अभियान को सफल बनाने में सहयोग देते हैं। 13 माह से चल रहे निर्मलीकरण अभियान में 70 से 80 साल के बुजुर्ग भी उत्साह से श्रमदान करते हैं। उन्हाेंने कहा कि ऐतिहासिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध ज्ञानसरोवर को उसकी पुरानी पहचान वापस दिलाना उनका उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि 13 माह से चल रहे अनवरत अभियान में देखा जाए श्रमदान के माध्यम से एक करोड़ से भी ज्यादा का कार्य हो चुका है।
अभियान में डीएम-एसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उत्साह के साथ श्रमदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बारिश और ठंडी की परवाह किए बिना श्रमदानी तड़के सुबह ज्ञानसरोवर पर स्वेच्छा से पहुंच जाते हैं और श्रमदान में हिस्सा लेकर पुण्य भी कमाते हैं। उन्होंने बताया कि नगर के वासी ही नहीं, दूर दराज से आने वाले बाराती भी यहां आकर श्रमदान कर चुके हैं। प्रतिदिन सुबह हर-हर महादेव के जयघोष के नारे के साथ मानव शृंखला बनाकर श्रमदान शुरू होता है। इस अभियान में दिनरात एक किए चेयरमैन हीरालाल मौर्य इसे महायज्ञ के समान मानते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के नुमाइंदों को ज्ञान सरोवर के निर्मलीकरण अभियान से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिसमें विगत एक साल से अनवरत समाज के सभी वर्ग के लोग ज्ञानसरोवर के दूषित जल एवं मलबे को श्रमदान द्वारा निकाल बाहर कर जन स्वास्थ्य एवं वातावरण को स्वच्छ रखने में मददगार साबित हुए हैं।
सेंट्रल बार के पूर्व अध्यक्ष विकास नरायण सिंह ने बताया कि काशी नरेश के वंशज हरिहर सिंह ने 1716 के करीब ज्ञानसरोवर का निर्माण कराया था। इसकी महत्ता इतनी थी कि आजादी के बाद भी मुकदमे के सिलसिले में ज्ञानपुर आने वाले लोग सरोवर के पानी से ही सतुआ घोलकर सेवन करते थे। सरोवर का पानी सत्तर से अस्सी दशक तक स्वच्छ पीने योग्य था। उन्होंने बताया कि सरोवर की दुर्दशा के लिए यहां के जनप्रतिनिधि भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने मंच पर भाषण देकर सिर्फ लोगों को आश्वासन देने का काम ही किया है। इसके जीर्णोद्धार के लिए कभी गंभीरता नहीं दिखाई।