ज्ञानपुर। अखिल भारत वर्षीय गोंड महासभा ने बुधवार को पारंपरिक हथियारों के साथ अपने अधिकार के लिए हुंकार भरी। गोंडवाना शहीद राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह बलिदान दिवस पखवारे के उपलक्ष्य में विभिन्न मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना दिया। महासभा के लोगों ने उनकी मांगाें को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्री मांगाें का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया।
गोंड महासभा के जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार गोंड ने कहा कि गोंड समाज को उपेक्षित किया जा रहा है। कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में गोंडवाना साम्राज्य के शासकों ने अंग्रेजों की खिलाफत की थी। अंग्रेजों ने साजिश करके उन्हें निहत्था गिरफ्तार किया था। तमाम आरोप लगाकर तोप से उड़ा दिया था, लेकिन आजादी के बाद भी गोंड समाज को उचित सम्मान, अधिकार नहीं मिल सका। इससे यह समाज उपेक्षित हो गया है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि गोंड समाज की आदिवासी संस्कृति है। आदिवासी संस्कृति मानवता को साक्षात प्रदर्शित करती है। ज्ञापन में धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राजगोंड को एससी में शामिल करने, अन्य जातियों में परिवर्तन करने से रोकने, कोर्ट और शासन के निर्देश का पालन करने, गोंडवाना समाज के शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने सहित अन्य मांगें शीघ्र पूरा करने की मांग की गई। धरना सभा में गोंड समाज के लोग पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र तीर और धनुष के साथ पहुंचे थे। धरने को सूर्यवंश गोंड, मुकेश गोंड, पन्नालाल गोंड, शांति देवी गोंड, संध्या गोंड आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर वीर बहादुर गोंड, रामजीत गोंड, दीपक गोंड, डॉ. ज्ञानेंद्र ध्रुव अादि मौजूद रहे।