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Bhadohi News: 27 गांवों के 200 किसानों की 920 बीघा फसल बाढ़ की भेंट चढ़ी

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ज्ञानपुर (भदोही)। गंगा की बाढ़ ने जिले के किसानों को गहरी चोट पहुंचाई है। बाढ़ से गंगा के तटवर्ती 46 गांवों में से 27 गांव ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से इन गांवों के तकरीबन 200 किसानों की 920 बीघा (184 हेक्टेयर) धान, बाजरा, दलहन आदि की फसल नष्ट हो गई। कृषि, राजस्व और बीमा कंपनी के सर्वे में फसल क्षति के ये आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि हकीकत में नुकसान इससे कहीं अधिक हुआ है। अब किसानों को क्षतिपूर्ति देने की कवायद शुरू हो गई है।
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जिले के दक्षिणी छोर पर गंगा का दायरा तकरीबन 45 किमी तक फैला है। एक तरफ प्रयागराज तो दूसरी तरफ मिर्जापुर, वाराणसी जिलों की सीमाएं हैं। अगस्त के शुरुआती दिनों में तेज बारिश और डैम से छोड़े गए पानी के कारण गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 80.200 को पार कर 80.500 मीटर तक पहुंच गया। इससे कटान होने के साथ ही तटवर्ती गांव छेछुआ-भुर्रा, इटहरा, कलिक मवैया, द्वारिकापुर, रामपुर, सेमराध समेत अन्य गांवों की कई बस्तियों में पानी भर गया। गंगा से सटे इलाकों में बोई गई धान, अरहर, बाजरा, तिलहन की फसलें कई दिनों तक पानी में डूबी रहीं। जलस्तर कम हुआ तो ये फसलें पानी में रहने के कारण पीली पड़ गईं और बाद में सूख गईं। किसानों को क्षतिपूर्ति देने के लिए कृषि, राजस्व और बीमा कंपनी की तीन सदस्यीय टीम ने औराई और डीघ ब्लॉक में सर्वे किया। इसमें पाया गया कि डीघ ब्लॉक के 15 गांवों में करीब 144 हेक्टेयर और औराई के 12 गांवों में 40 हेक्टेयर फसल बाढ़ से नष्ट हो गई। 20 से 25 फीसदी खेतीबारी को नुकसान पहुंचा है। सर्वे के बाद अब अफसर क्षतिपूर्ति का आकलन कर किसानों को मुआवजा देने की कवायद में जुट गए हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों से ज्यादा बीमा कंपनियों ने उठाए हैं। तीन सीजन में मौसम की वजह से जिले के 10 हजार से अधिक किसानों की फसल बर्बाद हुईं। बीमा कंपनियों ने महज 2525 किसानों को ही क्षतिपूर्ति दी। करीब 75 फीसदी किसानों को कागजात पूरे न होने का हवाला देकर क्षतिपूर्ति से वंचित रखा गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 और 2024 में बीमा कपंनियों ने 17 हजार बीमाधारक किसानों से पांच करोड़ 35 लाख से अधिक का प्रीमियम वसूला, जबकि प्रभावित किसानों को सिर्फ 74 लाख रुपये ही भुगतान किया। पांच करोड़ 35 लाख प्रीमियम में करीब तीन करोड़ रुपये बीमाधारक किसानों से वसूले गए थे। जबकि शेष राशि केंद्र और प्रदेश सरकार ने जमा की थी।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल पूरी तरह बर्बाद होने पर 47 हजार 950 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से प्रभावित किसान को मुआवजा देने का प्रावधान है। किसानों के मुताबिक प्रति हेक्टेयर खेती करने में लगभग 40 से 50 हजार रुपये की लागत आती है। फसल बर्बाद होने पर बीमा कंपनी इससे कम ही मुआवजा देती है।
जिले में अबकी बार कुल 60 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ की खेती की गई है। इसमें अकेले 54 हजार हेक्टेयर में धान, जबकि शेष छह हजार हेक्टेयर में दलहनी, तिलहनी, बाजरा, मक्का आदि की खेती की गई है।
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