ज्ञानपुर। ऊंज थानाक्षेत्र के गोधना गांव में एक बीघे जमीन की खरीद फरोख्त का मामला चर्चा में आ गया है। तहसील तक आश्रय देने वालों पर विधवा के भारी पड़ जाने की चर्चा जोरों पर है।
जिलाधिकारी को पत्रक सौंपने के बाद तहसील में तैनात राजस्व अधिकारियों से कार्रवाई की गुहार लगाने वाले राजेश कुमार, रामलाल, राजकुमार आदि ने बताया कि 1967 से चार बीघे जमीन सहखाता धारकों के जीवन-यापन का आधार थी। उसी में से कुछ लोग अपने-अपने हिस्से की भूमि की बिक्री कर चुके हैं। शोभई का नाम 1967 से वर्ष 2017 तक खतौनी में दर्ज नहीं हो सका था। 51 वर्ष बाद विधवा शांति देवी के नाम हकबंदी कराकर वारिसदार बनवा दिया गया। 2018 में विधवा ने अपने हक की जमीन बेच दी। विपक्षी उसी को आधार बनाकर बेची गई भूमि के साथ-साथ दूसरों के हिस्से को भी कब्जा करना चाहते हैं। आरोप लगाया कि दबाव में तहसील प्रशासन से गत दिनों नापजोख कराकर निर्माण तो शुरू करा दिया, लेकिन दूसरे पक्ष को न्याय दिलाने की ओर कोई प्रयास नहीं हो सका। पीड़ितों ने सभी साक्ष्यों के साथ अधिकारियों से पुन: पैमाइश करवाकर न्याय की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उधर तहसीलदार ज्ञानपुर सुनील कुमार का कहना है कि जमीन की पैमाइश कराई गई है। आरोप-प्रत्यारोप बेबुनियाद हैं।