ज्ञानपुर। इलाके के गोसाईं बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथा वाचक पं. विवेकानंद शास्त्री ने कृष्ण बाललीला और पूतना उद्धार का प्रसंग सुनाया। महाराज ने बताया कि सुख के साथी तो सब होते हैं। सुख सबको चाहिए, लेकिन दुख का सहभागी कोई नहीं होता। पुण्य सबको चाहिए, लेकिन पाप किसी को नहीं चाहिए। लेकिन हमारे गोविंद, भक्तों के अनेकों जन्मों के अर्जित पाप को भी चुरा लेते हैं। माखन चोरी करने पर माता से शिकायत के बाद अचानक कृष्ण वहां से खुद गायब हो जाते हैं। क्योंकि माखन भगवान को प्रिय होने के साथ ही सार तत्व है। इसलिए भगवान को मनुष्य के अंदर का सार तत्व ही प्रिय होता है। उन्होंने बताया कि कैसा भी प्राणी हो भगवान के सम्मुख जाने से उसका उद्वार जरूर होता है। भगवान भी ब्रज में रहकर माखन चोरी की लीला किए। इस दौरान वृंदावन की सुंदर कथाओं का वर्णन करते हुए बताया की बकासुर अघासुर जैसे दैत्यों का उद्धार, कालिया मर्दन के बाद गोवर्धन धारण कर उन्होंने ब्रज वासियों की रक्षा की। मौके पर रामप्रकाश, मुन्नू गुप्ता, गीरीसचंद्र, विश्वनाथ गिरी, सुनील कुमार, बाबा तेजप्रताप दास आदि मौजूद रहे।