जंगीगंज। सेमराधनाथ में माह भर चलने वाले कल्पवास मेल की तैयारी कच्छप गति से चल रही है। इससे तमाम समस्याएं मुंह बाए हुए खड़ी हैं। पहले स्नान पर्व को लेकर 31 दिसंबर से कल्पवासी आने लगेंगे, लेकिन अब तक 30 फीसदी भी काम नहीं हो सका है। लोक निर्माण और बिजली विभाग ने जहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, वहीं वन विभाग और जल निगम नदारद है। इसको लेकर आयोजन समिति के पदाधिकारियों में नाराजगी है।
काशी और प्रयाग के मध्य स्थित सेमराध में गत 22 वर्षों से कल्पवास लगता है। 23वें वर्ष में कल्पवास मेले को लेकर माह भर पूर्व प्रशासनिक दिशा-निर्देश असर विभागीय अधिकारियों पर नहीं पड़ रहा है। डीएम और सीडीओ के सख्त निर्देश के बाद भी कल्पवास मेले में पेयजल, शौचालय, लकड़ी आदि की व्यवस्था नहीं हो सकी है। दो जनवरी को पहले स्नान पर्व को लेकर 31 दिसंबर से कल्पवासी आने लगेंगे लेकिन मेले में सुविधाएं न होने से कल्पवासियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। आयोजक समिति के लोग जहां युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर सिर्फ बिजली विभाग और लोक निर्माण ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बिजली विभाग की ओर से करीब ज्यादातर कार्य पूर्ण कर लिया गया है जबकि लोक निर्माण विभाग 60 चकर प्लेट वहां पहुंचवाया है। कम चकरप्लेट होने से रास्ता भी नहीं बन सका है। वन विभाग, नगर पालिका और जल निगम अब तक सुस्त है। इनकी ओर से मेले में अब तक कोई सुविधा मुहैया नहीं हो सकी है। सेमराध कल्पवास मेला समिति के प्रमुख स्वामी करुणा शंकर दास ने बताया कि प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा एक और दो जनवरी को है। 31 दिसंबर से ही कल्पवासी आने लगेंगे। जिस गति से काम हो रहा है उसी तरह होता रहा तो कल्पवासियों को तमाम अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ेगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग किया कि मेले में समय रहते समुचित व्यवस्थाएं मुहैया कराई जाए। मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह ने कहा कि मेले की तैयारी पर नजर रखी जा रही है। जिन विभागों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है उन पर कार्रवाई होगी।