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डेंगू-मलेरिया को लेकर 86 गांव अतिसंवेदनशील

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बारिश के सीजन में अब मलेरिया और डेंगू ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। एक ही स्थान पर कई दिनों तक एकत्रित पानी संक्रामक बीमारियों के संवाहक बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अति संवेदनशील 86 गांवों में दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है। दो माह की जांच में 39 मलेरिया से पीड़ित मिले जबकि सरकारी आंकड़ों में डेंगू पीड़ितों की संख्या शून्य है। प्राइवेट अस्पतालों में एक माह में डेंगू के छह मरीज भर्ती हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में जल निकासी की सुविधा न होने से लगभग हर बस्ती में जलजमाव बना है। इसमें मच्छर भी पल बढ़ रहे हैं। साफ-सफाई और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं के छिड़काव को लेकर ग्राम पंचायतें उदासीन हैं। जिससे मच्छरजनित रोग फैलने लगा है। मलेरिया और डेंगू का प्रभाव धीरे-धीरे तेज हो रहा है। 16 अगस्त से स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव-गांव लार्वा नष्ट करने के लिए जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। इसमें 86 गांव ऐसे हैं जहां मलेरिया और डेंगू फैलने की आशंका अधिक है। ऐसे गांवों में प्राथमिकता के आधार पर जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी राम आसरे पाल ने कहा कि चकबेदहूं, क्षत्रशाहपुर, कसिदहां, अईनछ, भवानीपुर, भुड़की, पटेलनगर, आनंदडीह, गड़ौरा, तलवां, दयालपुर, सेमराध, छेछुआ-भुर्रा, धनीपुर, रजईपुर, सीतामढ़ी, नारेपार, मझगवां, हरियावं, गंगापुर, याकूबपुर, घोसिया, चकवां, भवानीपुर, द्वारिकापुर, अछवर, बभनौटी समेत 86 गांव अति संवेदनशील है। विभाग की ओर से जिले में डेंगू के रोगी नहीं होने की बात भले ही की जा रही है, लेकिन गोपीगंज और ज्ञानपुर में अब तक छह मरीज मिल चुके हैं। जिनका उपचार वाराणसी और प्रयागराज के अस्पतालों में हो रहा है। 16 अगस्त से विभागीय टीम चिह्नित गावों में दवाओं का छिड़काव कर रही है। दो महीने तक चलने वाले अभियान में सभी गांव तक पहुंचा जाएगा। मलेरिया लार्वा वाले चिह्नित स्थलों पर जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। शिकायत मिलने पर अन्य स्थानों पर भी दवाओं का छिड़काव किया जाता है।
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