भदोही। बज्मे अहले कलम की जानिब से रविवार की रात कटरा बाजार में अदबी शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। नशिस्त का आगाज हामिद भदोहवी के नाते पाक से हुआ। इसके बाद शायरों ने अपने अशआर से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। शायरों ने जब अपने चंद लाइनों से वतन से मुहब्बत का पैगाम दिया तो लोगों का दिल बाग-बाग हो गया। नशिस्त आधी रात के बाद खत्म हुआ।
फैज भदोहवी ने सुनाया, खाके वतन पर हंस कर जो क़ुर्बान हो गए, ऐसे बहादुरों को हमारा सलाम है...। सलमान भदोहवी ने अपना कलाम वतन से मुहब्बत हमें इस कदर है, जान व दिल इस पर लुटाते रहेंगे... सुनाया तो लोगों ने इरशाद कहकर हौसला अफजाई की। तौसीफ कैसियस ने चाहे जितना इसे संवारो तुम, डोर सांसों की टूट जानी है, देखकर प्यास को मेरी तौसीफ, अब समुंदर भी पानी पानी है... सुनाया तो रईस अंसारी ने जो चाहता है जमाने में सुरखुरू होना, उसे कहो कि बुजुर्गों का एहतेराम करे...। साबिर जौहरी का कलाम मेरा बोझ मिलकर उठाने लगे हैं, कि बच्चे मेरे अब कमाने लगे हैं, तेरे याद की चल रही हैं हवाएं, सभी जख्में दिल मुस्कुराने लगे हैं... सुनाकर महफिल लूटी। सदारत अबु ओसामा अंसारी ने निजामत रईस भदोहवी ने की। सुहैल नदीमी, राजी भदोहवी ने भी अपने कलाम से नवाजा। दानिश जिब्रान, पेंटर भाई, फैयाज अंसारी मौजूद रहे।