ज्ञानपुर। हर घर को धुआंमुक्त बनाने के लिए सरकार ने रसोई गैस देने की उज्जवला योजना के लिए पात्रता श्रेणी हटा दी है। अब रेसाई गैस कनेक्शन से वंचित सभी व्यक्तियों को इस योजना का मिल सकेगा। भदोही में विस्तारित उज्जवला योजना के दूसरे चरण में 48 हजार परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा।
हास्टल चौराहे पर स्थित खान गैस एजेंसी पर शनिवार को उज्जवला योजना के नोडल अधिकारी समीर सहगल योजना को लेकर पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि 2014 में जिले में 48 प्रतिशत आबादी के बाद गैस कनेक्शन था। दो लाख 81 हजार परिवारों के सापेक्ष अब तक दो लाख 17 हजार परिवार धुआं से मुक्त हो चुके हैं। 48 हजार कनेक्शन और देने के बाद करीब-करीब पूरा जिला धुआंमुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में पात्रता की कई शर्तें थी लेकिन अब सरकार ने जाति, धर्म, पात्रता की सभी शर्तें हटा दी है। परिवार के राशन कार्ड उज्जवला योजना का कनेक्शन दिय जाएगा। बताया कि पूर्व में लाभार्थी की सब्सिडी नहीं दी जाती थी लेकिन अब शुरूआती छह सिलेंडर पर सब्सिडी मिलेगी। उसके बाद सब्सिडी से कनेक्शन का खर्च कट जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में भारत गैस के 27 हजार, एचपी के 44 और इंडेन के 47 हजार लाभार्थी हैं। मौके पर शाहिद खान आदि रहे।
लकड़ी से सस्ता होता है सिलेंडर
ज्ञानपुर। उज्जवला योजना के नोडल अधिकारी समीर सगहल ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लकड़ी और सिलिेडर खर्च की तुलना करती हैं। सिलेंडर पर खाना न बनाकर लकड़ी से बनाती है। औसतन हर महीने लकड़ी से खाना बनाने पर आठ से नौ सौ रुपये खर्च आता है, जबकि गैस से 500 तक ही खर्च आता है। लकड़ी से प्रदूषण जहां बढ़ता है वहीं ग्लोबल वार्मिंग और बीमारी भी बढ़ती है।