सीतामढ़ी। श्री राम जन्म भूमि अयोध्या में रामलला के भब्य मंदिर निर्माण का मार्ग सीतामढ़ी की पवित्र मिट्टी प्रशस्त करेगी। इस पावन कार्य का श्री गणेश रविवार को उस समय हुआ जब माता सीता की तपोभूमि सीतामढ़ी का कोना कोना श्री राम नाम के जयकारे से झंकृत हो उठी। इसे महज संयोग कहा जाए या हरि प्रेरणा कि अयोध्या से चलकर परमहंस जी महाराज सीता माता की आश्रय स्थली सीतामढ़ी की पवित्र मिट्टी लेने पहुंचे है। श्री राम भक्त इसे अयोध्या में रामलला के भब्य मंदिर निर्माण के लिए शुभ संकेत के रूप में देख रहे है।
सीतामढ़ी की पवित्र मिट्टी न सिर्फ दो धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों के रिश्तों को प्रगाढ़ करेगी बल्कि जाने अनजाने में गूढ़ आध्यामिक रहस्यों को भी सुलझाएगी क्योकि अयोध्या में श्री राम का जन्म हुआ था तो सीतामढ़ी में माता सीता का निर्वासन काल व्यतीत हुआ। इसे काल चक्र या संयोग ही कहेंगे कि एक समय था जब भगवान श्री राम राजमहल में थे और उन्होंने लक्ष्मण जी से माता जानकी को सीतामढ़ी के घनघोर जंगल में छोडवा दिया था। माता का निर्वासन काल महर्षि वाल्मीकि के आश्रम (कुटिया) में व्यतीत हुआ था लेकिन आज सीतामढ़ी में माता सीता जी भब्य मंदिर में विराजमान है तो अयोध्या में श्री राम जी टाट पट्टी में है। हमारे धर्म ग्रंथ यह भी कहते है कि कोई भी धार्मिक कार्य बिना अर्धांगिनी के पूर्ण नही होता इसलिए भी अयोध्या के लिए सीतामढ़ी की मिट्टी यह शुभ संकेत देती है कि श्री राम का भब्य मंदिर निर्माण बिना सीता समाहित स्थल की पवित्र मिट्टी के कैसे पूर्ण हो सकता है। खास बात तो यह है कि जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा तो उसमें अकेले रामलला विराजमान होंगे वहीं भदोही के सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी के भब्य मंदिर में सिर्फ माता जानकी की दिब्य मूर्तियां स्थापित है जो करोड़ो श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास की प्रतीक है।