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मन से पुकारने पर मदद करते हैं भगवान

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सुरियावां। पूरेमनोहर अभिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथा मर्मज्ञ पं. जटाशंकर दूबे ने भगवान के गजग्राह चरित्र की कथा सुनाई। कहा कि समस्त जीवधारी मनुष्य गज की भांति हैं और माया मोह मगरमच्छ की तरह हैं। जिस प्रकार से हाथी के पैर को मगरमच्छ ने पकड़ लिया था और हाथी किसी प्रकार से बलवान मगरमच्छ से अपने पैर को नहीं छुड़ा पाया, उसी प्रकार हाथी रूपी मानव को मगरमच्छ रूपी माया ने जकड़कर कैद कर लिया है। जिस प्रकार से हाथी दीनहीन होकर भगवान की शरण में ध्यान लगाता है, उसी प्रकार मनुष्य को भगवान के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए और मनुष्य जिस समय ऐसा करता है, उसी समय भगवान संसार रूपी मगरमच्छ से मानव को मुक्ति दिला देते हैं। इस प्रकार व्यक्ति को हर समय हर स्थिति में भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। मानव शरीर धारण करने का यही एक फल है कि अंत समय में भगवान की स्मृति बनी रहे। कथा में प्रमुख रूप से सचिन कुमार त्रिपाठी, विद्याधर मिश्र, राजराजेश्वर त्रिपाठी, त्रिवेणी उपाध्याय, रामकरन पाल, डॉ. मनोज दूबे, पं रमापति दूबे सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
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