घोसिया। औराई के जयरामपुर गांव में दो दिन में छह मवेशियों की अज्ञात बीमारी से मौत हो गई। रविवार को तीन मवेशियों की जान चली गई। अब भी गांव में कई मवेशी बीमार हैं। जानकारी देने के बाद भी पशुपालन विभाग की टीम के नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
जयरामपुर गांव में तीन से चार दिनों के दौरान अज्ञात बीमारी के संक्रमण से मवेशी बीमार हो रहे हैं। संक्रमित मवेशी का पेट फूलने के बाद वह सुस्त हो रहे हैं। जब तक पशुपालक उपचार कराने के बारे में सोचता है, उससे पहले ही मवेशी की जान चली जा रही है। गांव निवासी संदीप कुमार यादव ने बताया कि पशु खूंटे पर बंधे हैं। चारा खाने के बाद पेट फूलते ही दस मिनट के अंतराल में मौत के मुंह में समा रहे हैं।
छबिनाथ यादव, गुलाब चंद्र यादव की भैंस, लालचंद्र की गाय समेत छह पशुपालकों के छह मवेशी मर चुके हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया गया कि पशु पालन विभाग की ओर से न ही समुचित उपचार कराया जाता है और न ही बीमा। जबकि सरकार ने योजना संचालित कर पशुपालकों को लाभान्वित कराने का दंभ रहा है। शिकायत के बाद भी अब तक कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। चेतावनी दी गई कि शीघ्र कदम नहीं उठाया गया तो पशुपालक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था, टीम भेजकर पशुओं का उपचार किया जाएगा। मौसम के उतार-चढ़ाव में पशुओं की समुचित देखभाल ही बचाव है। विभाग की ओर से टीकाकरण समय-समय होता रहता है।
आश्रयस्थलों की हालत खराब
ज्ञानपुर। छुट्टा पशुओं के लिए जगह-जगह बनाए गए अस्थायी गोशालाओं की हालत भी बदहाल है। ज्ञानपुर के चकवां, रजापुरा समेत अन्य गावों में खानपान,पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। पशुपालन विभाग भी इसको लेकर संजीदा नहीं दिख रहा है। डा.जेडी सिंह ने कहा कि शासन से मिला बजट अस्थाई गौशालाओं के लिए भेजा जा चुका है।