ज्ञानपुर। ओडीएफ घोषित जिले की हकीकत काफी कड़वी है। जिले की सभी 561 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन 90 फीसदी से अधिक गांवों में शौचालय अनुपयोगी हैं। कहीं शौचालय में उपली रखी है तो कहीं पशुओं का चारा रखा गया है। इससे मोदी सरकार के स्वच्छता मिशन को झटका लग रहा है। शनिवार को ज्ञानपुर ब्लॉक के गांवों में अमर उजाला ने शौचालय निर्माण की हकीकत देखी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जिला मुख्यालय से बमुश्किल दो किमी दूर लखनों गांव की दलित बस्ती। यहां की इसरावती देवी, कपूरा देवी, सुधा और सीमा के शौचालय तो बने हैं पर सोख्ता न बनने से सभी शोपीस हो गए। कई महीने से इसी हाल में पड़े शौचालय दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। इसी तरह सरपतहां, चकटोडर, गिरधरपुर गांवों में शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं मिली। गांवों में प्रधानों की मनमानी से पीएम के स्वच्छता मिशन का बंटाधार हो रहा है। आधे-अधूरे शौचालय बनाकर छोड़ दिए गए हैं, लेकिन कागज में निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया गया है। पाली भिड़िउरा गांव में महज एक से डेढ़ फीट की खुदाई के बाद सोख्ते की ईंट जमीन के ऊपर जोड़ दी गई है।
जिले में बहुत से शौचालयों की चहारदीवारी खड़ी कर दी गई है लेकिन छत नहीं है। कहीं, दरवाजे और कमोड लगाना ही भूल गए। यही नहीं, जमीन के अंदर सोख्ते बनाने के बजाय दोयम दर्जे की ईंटों से ढ़ाई-तीन फीट तक खड़ा कर दिया गया है। शौचालय के नाम कोठरी बनाकर उस पर इज्जत घर लिखवाने और शिलापट्ट लगवाने की होड़ मच गई है। कमीशन के खेल में स्वच्छ भारत अभियान की हवा निकल रही है। अमर उजाला टीम शनिवार को ज्ञानपुर ब्लॉक के लखनों, सरपतहां, चकटोडर, गिरधरपुर और भिदिउरा गांव में हकीकत देखने पहुंची। लखनों की दलित बस्ती में शौचालय बने हैं मगर उपयोग लायक नहीं है। ब्राह्मण बस्ती में अब तक शौचालय बन ही नहीं सके हैं। सरपतहां में दलित बस्ती में शौचालय बने हैं लेकिन आधे अधूरे हैं। सरोज बस्ती में विधवा फूलवती देवी को शौचालय आवंटित हुआ लेकिन अब तक नहीं बन सका। इसी तरह, चकटोडर मुसहर बस्ती में पिंटू लाल, सेवालाल समेत आठ से 10 लाभार्थियों के शौचालय आधे अधूरे ही छोड़े गए हैं। इसी तरह भिदिउरा, गिरधरपुर आदि गांवों में 80 फीसदी से अधिक शौचालयों का निर्माण आधा अधूरा ही है, लेकिन प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है।
शौचालयों के निर्माण का सत्यापन किया जा रहा है। जिन गांवों में आधे अधूरे शौचालय बने हैं, उन गांव के प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई होगी।
- हरिशंकर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी