सुरियावां। बिहियापुर गांव में आयोजित दिव्य श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। अंतिम दिन यानी विश्राम दिवस पर कथाव्यास पं. जटाशंकर दूबे ने भगवान के 16108 विवाहों का उल्लेख किया। साथ ही कृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि दाता द्वारिकाधीश की तरह होना चाहिए।
सुदामा जी की पत्नी वसुंधरा यदुवंशियों के कुल पुरोहित गर्गाचार्य की पुत्री थी। लेकिन, अपने पति के साथ बड़ी दीन-हीन दशा में समय व्यतीत कर रहीं थीं। स्थिति ऐसी आ गई कि घर में भोजन करने के लिए अन्न भी नहीं रहा। बालक भूख प्यास के कारण रोने लगे। इस अवस्था को देखकर मां भी रुदन करने लगी और सुदामा जी को कृष्ण के पास जाने के लिए विवश कर दिया। सुदामा जी पत्नी की बात मानकर द्वारिका गए। द्वारिकाधीश ने उनकी काफी आवभगत की। प्रत्यक्ष रूप से द्वारिकाधीश ने सुदामा को कुछ नहीं दिया, विदा कर दिया। जब सुदामा घर पहुंचते हैं तो पूरी दशा परिवर्तित दिखाई पड़ती है। सुदामा ने देखा कि हमारा नगर तो द्वारिकाधीश के महल से भी बढ़कर हो गया है। पत्नी के द्वारा पता चला कि आपके द्वारिका पहुंचते ही भगवान के आदेशानुसार इस विशाल राज प्रासाद का निर्माण किया गया। सुदामा इस बात को जानकर रुदन करने लगे और विचार करने लगे कि भगवान ने इतना सब कुछ दे दिया और इस संबंध में मुझसे कुछ बताया भी नहीं। दाता भगवान की तरह होना चाहिए। कथा में प्रमुख रूप से कमला प्रसाद पांडेय, रामलखन, राम शिरोमणि दूबे, लालचंद, गोपीनाथ पांडेय, भोलानाथ तिवारी समेत बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।