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कथा में गजग्राह चरित्र का किया वर्णन

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सुरियावां। इलाके के बिहियापुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को पं. जटाशंकर दूबे ने गज ग्राह चरित्र का वर्णन कर भक्ति के मर्म को समझाया। उन्होंने भागवत महापुराण के अष्टम स्कंद से लेकर दशम स्कंद तक की कथा सुनाई।
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कहा कि समाज में अहम स्थान रखने वाली मां, मास्टर, मिनिस्टर और महात्मा अपने धर्म का निर्वहन सही करें तो व्यवस्था अपने आप ठीक हो जाएगी। जन्म के बाद बालक माता के सानिध्य में अधिक समय व्यतीत करता है। उसके बाद नौकरी-पेशा करता है और सेवानिवृत्ति के बाद महात्मा की शरण में चला जाता है। उन्होंने गज ग्राह चरित्र के माध्यम से यह बताया कि जब व्यक्ति गज की तरह दीन-हीन होकर भगवान को पुकारता है तो वे वैकुंठ छोड़कर भक्त की रक्षा करते हैं। समाज के कल्याण के लिए अगर व्यक्ति को विष जैसी कड़वी बात को ग्रहण करना पड़े तो ग्रहण कर लेना चाहिए। कथा पंडाल में बाल कृष्ण की भव्य झांकी निकाली गई। मौके पर राम भवन मिश्र, कमला प्रसाद पांडेय, भगवती प्रसाद, श्याम सुंदर, डीसी गुप्ता, राधेश्याम दूबे आदि रहे।
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