ज्ञानपुर। दीपों के पर्व दीपावली पर जमकर आतिशबाजी हुई। जिले में करीब 70 से 80 लाख के पटाखे फोड़े गए। पटाखे से निकलने वाले धुएं से जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा, वहीं दमा रोगियों को परेशान होना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी शहरी क्षेत्रों में हुई। इन स्थानों पर आतिशबाजी के बाद घंटों तक धुएं का गुबार आसपास ही मंडराता रहा।
जिले में 28 आतिशबाजों को पटाखा कारोबार का लाइसेंस है। दीपावली के लिए 75 आतिशबाजों को अस्थायी लाइसेंस बेचने के लिए दिए गए, लेकिन 150 से अधिक स्थानों पर अवैध तरीके से दुकानें सजाकर पटाखा का कारोबार किया गया। ज्ञानपुर नगर के विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में पटाखा की दुकानें सजी थी, जबकि सुरियावां, गोपीगंज, भदोही आदि स्थानों पर रामलीला मैदान चिह्नित था। प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद कई स्थानों पर पटाखे की दुकान लगाकर बिक्री की गई। चौरी, कोइरौना आदि क्षेत्रों में पुलिस की उदासीनता से पटाखा कारोबारियों की चांदी रही। ज्ञानपुर, सुरियावां, भदोही और गोपीगंज पटाखों की बिक्री के लिए बड़ा केंद्र रहे। दीपावली के त्यौहार पर मंदी का भी असर नहीं दिखा। पर्व के कुछ दिन पूर्व से पटाखे की बिक्री शुरू हो गई थी जो दीपावली तक हुई। पर्व के दिन सुबह से लेकर देर रात तक युवा पटाखा खरीदते रहे।
एक अनुमान है कि 70 से 80 लाख का पटाखा कारोबार रहा। पटाखा कारोबारी जेपी सिंह ने कहा कि पटाखा कारोबार अच्छा रहा। 70 लाख से एक करोड़ तक पटाखे का कारोबार हुआ है। वहीं दूसरी ओर आतिशबाजी का दुष्प्रभाव भी काफी रहा। धुआं युक्त पटाखा जलाने पर वातावरण में धुआं -धुआं ही दिखने लगा। ग्रामीण इलाकों में माहौल खुला होने से पटाखे का खास असर नहीं दिखा लेकिन नगरीय इलाकों जैसे भदोही, सुरियावां, गोपीगंज की गलियों में पटाखों का धुआं काफी समय तक दिखा। इससे धुएं से हर कोई परेशान दिखा। सबसे अधिक दिक्कत दमा की बीमारी से पीड़ित लोगों की रही। जिला अस्पताल ज्ञानपुर के कर्मचारियों की मानी जाए तो सोमवार को दिन भर में दो से तीन मरीज दमा और सांस रोगी के पहुंचे।
कोर्ट का फरमान भी रहा बेअसर
ज्ञानपुर। दीपावली के दिन रात 10 बजे तक आतिशबाजी का फरमान बेअसर ही दिखा। पर्व को लेकर उत्साहित लोग रात करीब दो बजे और उसके बाद भोर में भी आतिशबाजी की। पुलिस ऐसे लोगों पर सख्ती नहीं दिखा सकी। माना जा रहा है कि खुशी के इस पर्व पर पुलिस खलल नहीं डालना चाहती थी, जिससे कोर्ट का आदेश बेअसर होकर रह गया।