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रोटहां विस्फोट: बंगाल में भी ठप पड़ा काम

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चौरी। यूपी से पश्चिम बंगाल तक हिला देने वाले रोटहां विस्फोट की असली वजह का खुलासा अब तक नहीं हो सका है, लेकिन इस घटना ने कालीन कारोबार को काफी प्रभावित कर दिया है। बंगाल में ब्रांच लगाकर कालीन बुनाई कराने वाले यहां के निर्यातकों का काम वहां भी ठप पड़ गया है। वहां के स्थानीय बुनकरों ने बांग्लादेशी होने की अफवाहों से नाराज होकर काम ठप कर दिया है।
चौरी के रोटहा में 23 फरवरी को हुए विस्फोट का असर जिले के कालीन व्यवसाय से लेकर पश्चिम बंगाल तक दिखाई दे रहा है। बांग्लादेशी होने की अफवाहों से नाराज बुनकरों ने न केवल पश्चिम बंगाल में कालीन का काम ठप कर दिया, बल्कि भदोही जिले में काम करने वाले बुनकरों को भी वापस बुलाना शुरू कर दिया है। वहीं पश्चिम बंगाल में कालीन ब्रांच चलाने वाले भदोही जिले के लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है। तिब्बती कालीनों के तेज उत्पादन में पश्चिम बंगाल के बुनकरों को माहिर माना जाता है। इसलिए जिले भर में तिब्बती कालीनों के लूमों पर पश्चिम बंगाल से आए बुनकर ही काम करते दिखाई देते हैं। काम तेज हो, इसके लिए निर्यातकों ने पश्चिम बंगाल में अपनी ब्रांच खोल रखी है, लेकिन विस्फोट के बाद लूमों पर चढ़े कालीन जस के तस पड़े हैं। इससे निर्यातकों को समय से ऑर्डर पूरा करने की चिंता सताने लगी है।
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के इनायतपुर, धर्मपुर, सत्तारी, बलुवा घाट, इमरती आदि स्थानों पर जिले के कालीन निर्यातक कंपनी खोले हैं, लेकिन घटना के बाद से वहां भी कामकाज न के बराबर हो रहा है। बांग्लादेशी होने के अफवाह से जिले के ही नही बल्कि बंगाल में काम करने वाले बुनकरों ने नाराज होकर कामकाज ठप कर दिया है। सत्तारी में निर्यातकों के ब्रांच पर कामकाज देख रहे नसीम अहमद और अतहर अली ने बताया कि हर चौराहे और चौरहों पर जिले के लोगों के खिलाफ बातें हो रहीं थीं। कहा कि रोटहां की घटना के बाद भदोही जिले का कोई कारखाना मालिक अगर कालीन अधूरा होने की दुहाई देकर बुनकरों को रोकने की बात करता तो इससे गुस्साए बुनकर पश्चिम बंगाल में ब्रांच चलाने वालों को बंधक बनाने की कोशिश करने लगते थे।
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