ज्ञानपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-इलाहाबाद सिटी सेक्शन पर चल रहे दोहरीकरण कार्य की जद में आकर दो दर्जन से अधिक हैंडपंपों के अस्तिव पर खतरा मंडराने लगा है। स्टेशनों के दोनों छोरों पर स्थापित केबिनों के सामने लगे इन हैंडपंपों को उखाड़े जाने से कर्मचारियों के सामने पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के औड़िहार-कटका और माधोसिंह-इलाहाबाद सेक्शन पर करोड़ों की लागत से दोहरीकरण, स्टेशन भवन निर्माण, ओवरफुट ब्रिज जैसे कार्यों को कराया जा रहा है। अहिमनपुर, जंगीगंज, भीटी, हंडिया, सैदाबाद, रामनाथपुर, झूंसी आदि स्टेशनों के पूर्वी एवं पश्चिमी छोर पर पूर्व में स्थापित कराए गए समपार पर तैनात होने वाले कर्मचारियों को पेयजल मुहैया कराने के लिए हजारों रुपये खर्च कर हैंडपंपों की स्थापना कराई गई थी, जो अब दोहरीकरण प्रोजेक्ट के दायरे में आ चुके हैं। जबकि इसके पहले भी उन हैंडपंपों की स्थापना से लेकर अब तक समपार पर तैनात कर्मचारी आसपास के गांवों में लगे पेयजल संसाधनों पर ही आश्रित रहकर काम निकाल रहे थे। शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी मंडल स्तरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेकर निवारण नहीं कराया। बारिश का मौसम रहा हो अथवा ठंड और गर्मी का, मुख्य यातायात निरीक्षक के निर्देश पर एक रंगीन बाल्टी और एक मग ही कर्मचारियों का सहारा बने थे। प्रोजेक्ट का दायरा काफी लंबा होने से आने वाले दिनों में कर्मचारियों के समक्ष पेयजल की समस्या दिखाई देने लगी है। सेक्शन पर कार्यरत निरीक्षकों का कहना है कि दोहरीकरण के दायरे में हैंडपंपों के अलावा केबिल बॉक्स, समपार भवन आदि भी आ रहे हैं, जिनका निर्माण पास स्थित रेलवे की जमीन में ही कराकर व्यवस्थित करा दिया जाएगा। जद में आने वाले हैंडपंपों को भी उचित स्थान पर स्थापित कराकर पेयजल की समस्या से निजात दिलाई जाएगी।