ज्ञानपुर। गांव के विकास की रूपरेखा तैयार करने में जिले की 50 फीसदी ग्राम पंचायतें उदासीन बनी हुईं हैं। शासन से 31 दिसंबर तक कार्ययोजना को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करना था, लेकिन अब तक 561 में 281 गांव ही प्रस्तावित कार्य भेज सके हैं। समय रहते कार्ययोजना नहीं भेजने पर 14वें वित्त का मिलने वाला बजट भी रुक सकता है।
गांव के विकास से ही देश आगे बढ़ता है। इसको लेकर आजादी के बाद से ही सरकारों की ओर से प्राथमिकता में गांव का विकास ही रहता है। गांवों में खड़ंजा, नाली, हैंडपंप रिबोर, मनरेगा, शौचालय, आवास समेत अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। इसके लिए प्रधान, सदस्य और ग्रामीणों संग खुली बैठक कराकर प्रस्ताव तैयार कर विभाग के पास भेजा जाता है। उसी प्रस्ताव के आधार पर संबंधित ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष में बजट की स्वीकृति मिलती है। शासन के निर्देश पर पंचायत राज विभाग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में 31 दिसंबर तक प्रस्तावित काम की कार्ययोजना तैयार कर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश जिले के 561 ग्राम पंचायतों के सेक्रेटरी, वीडीओ और ग्राम प्रधान को दिया था। विभाग की तमाम सख्ती के बाद भी अब तक 281 पंचायतों ने ही कार्ययोजना को अपलोड की है, जबकि दो से तीन दिन ही शेष बचे हैं। तीन दिन के अंदर जो पंचायतें कार्ययोजना नहीं भेजेंगी, उन्हें आने वाले समय में 14वें वित्त से मिलने वाला बजट भी अवरूद्ध हो सकता है। आंकड़ों पर गौर करें तो अभोली में 56 गांवों में 24, भदोही में 126 में 61, डीघ में 98 में 36, ज्ञानपुर में 92 में 28, सुरियावां में 66 में 45 और औराई में 128 में 75 ग्राम पंचायतों ने कार्ययोजना भेजी है। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि 31 दिसंबर तक सभी गांव अपनी कार्ययोजना को ऑनलाइन अपलोड कर दें अन्यथा भविष्य में बजट स्वीकृति मिलने में दिक्कत हो सकती है।