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बैकों की बंदी का दूरगामी असर

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भदोही। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन के आह्वान पर शुक्रवार को सरकारी क्षेत्र के विभिन्न बैंकों की हड़ताल रही। बैंक हड़ताल से करीब 20 करोड़ की चेक क्लीयरिंग नहीं हो सकी। हड़ताल में शामिल बैंक अधिकारियों ने कामकाज ठप कर प्रदर्शन किया। ऐसे में उपभोक्ताओं को बैंक आकर निराश लौटना पड़ा।
बैंक अधिकारी बैकों के विलय को लेकर नाराज हैं। इसके अलवा देश भर में ड्यूटीरत अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने आवाज उठाई, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। अधिकारी सरकार की नई पेंशन स्कीम का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुरानी पेंशन स्कीम को लागू रहने दिया जाए। इन्हीं मांगों को लेकर जनपद के लगभग चार दर्जन बैकों के ताले नहीं खुले। बैंक आफिर्स के हड़ताल पर जाने से बैंकों के क्लर्क स्तर के कर्मचारी भी कामकाज में सहभाग नहीं कर सके। हड़ताल से जिले के विभिन्न शाखाओं में 20 करोड़ रुपये के क्लीयरिंग चेक डंप रहे।
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बैंक अधिकारियों ने कहा कि काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सुविधाएं देने के नाम पर सरकार कटौती करती जा रही है। बीते कुछ वर्षों में उन पर दबाव बढ़ा है। अब अपने हितों की हितों की उपेेक्षा बर्दाश्त नहीं करेंगे। अधिकारियों ने हड़ताल से सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो और सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। शुक्रवार की बंदी का बाजार पर दूरगामी असर पड़ा है। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मानद सचिव, हाजी शाहिद हुसैन अंसारी ने कहा कि हड़ताल के बाद शनिवार को चौथे शनिवार की बंदी और उसके गले दिन रविवार की बंदी होने से उद्यमियों के साथ साथ किसानों और मजदूरों की कमर टूट जाएगी। उधर ज्ञानपुर में हड़ताल के कारण बैंकों के शटर नहीं उठे। बैंक अधिकारी कामकाज ठप कर प्रदर्शन किए और अपनी मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग दोहराई।
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