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समाधान दिवस...

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ज्ञानपुर। राजस्व और पुलिस के मामले निस्तारण के लिए तहसील दिवस से पृथक प्रत्येक थाने में पहले और तीसरे शनिवार को समाधान दिवस आयोजित होता है। लेकिन, यह दिवस उद्देश्य पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर पा रहा है। समाधान दिवस पर आने वाले प्रार्थना पत्रों का मौके पर नाम मात्र का ही निस्तारण हो पाता है। वहीं निर्धारित समय सीमा में ज्यादा से ज्यादा 50 फीसदी आकड़ा किसी तरह पूरा हो पाता है। पिछले तीन महीने के आंकड़ों पर नजर डाले तो यही मामला सामने आता है।
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सूबे में नए निजाम आने के बाद अप्रैल से समाधान दिवस आयोजन शुरू हुआ,जून तक कुल छह समाधान दिवस आयोजित हुए।तीनों माह में सवा तीन सौ प्रार्थना आए। इसमें से महज 166 मामले का निस्तारित हो सका है, मई माह में सर्वाधिक 135 मामले आए। इसमें राजस्व के 110 मामले में 66 और पुलिस के 25 मामले में 20 निस्तारित हो सका। जबकि अप्रैल में आए 79 मामले में राजस्व के 23 प्रार्थना पत्रों में दो, पुलिस के 56 माम लों में सभी निस्तारित हो गए।इसके अलावा जून में 111 मामले आए और दोनों दिवसों को मिलाकर कुल 15 मामलों का ही निस्तारण हो सका। इसमें जून के दूसरे समाधान दिवस में आए 61 मामलों में से महज सात को ही निस्तारित किया जा सका। खास बात कि राजस्व और पुलिस कर्मियों की लापरवाही और मिलीभगत होने से अधिसंख्य शिकायतों का निस्तारण जान बूझकर नहीं हो पाता। इसके चलते फरियादी जनता दर्शन, तहसी ल दिवस से लेकर समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर चक्कर लगाते रहते हैं। उच्चाधिकारियों की मॉनिटरिंग सही ढंग से न होने से स्थानीय स्तर पर मामले लंबित रह जाते हैं। इससे दिवस उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाता है।
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