ज्ञानपुर। उपभोक्ता को हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ न देकर कंपनी ने सेवा में कमी की है। कंपनी को जुर्माने के रूप में दंडित किया जाना आवश्यक है। जिला उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश संजय कुमार डे ने यह टिप्पणी करते हुए इंश्योरेंस कंपनी पर 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया। पीड़ित के इलाज खर्च में आए करीब डेढ़ लाख रुपये भी दो माह के अंदर देने का आदेश दिया। चेताया कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो 12 फीसदी ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।
उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि ज्ञानपुर के तिवारीपुर निवासी अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने उपभोक्ता आयोग में 19 दिसंबर 2023 को शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि नवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी, नई दिल्ली पर इंश्योरेंस पैसा भुगतान न करने का आरोप लगाया। पीड़ित के अधिवक्ताओं के अनुसार अश्वनी त्रिपाठी ने 15 मार्च 2023 को पांच लाख की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पीड़ित में इसके प्रीमियम के रूप में 25 हजार 229 रुपये इंश्योरेंस कंपनी को अदा किया था। बताया कि पीड़ित 11 अक्टूबर 2023 को बीमार हुआ और जिला अस्पताल में इलाज कराने के बाद आराम न मिलने पर प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में 16 अक्तूबर, 2023 को भर्ती हुआ। वहां 20 अक्तूबर तक इलाज चलने के बाद मेदांता लखनऊ में 27 अक्तूबर तक इलाज कराया। इलाज के बाद पीड़ित ने इलाज खर्च के सभी बिल इंश्योरेंस कंपनी को भेजी। इसके बाद भी कंपनी ने इंश्याेरेंस का लाभ नहीं दिया।
बुधवार को उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश संजय कुमार डे और सदस्य विजय बहादुर सिंह ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनी। आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज खर्च का डेढ़ लाख रुपये के साथ सेवा में कमी के लिए 50 हजार और मुकदमा खर्च 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया। चेताया कि दो माह के अंदर जुर्माना समेत इलाज खर्च की राशि न देने पर 12 फीसदी ब्याज की दर से जुर्माना लगेगा।