ज्ञानपुर। गेहूं बुआई के शुरूआती दिनों में ही जिले की 52 सहकारी समितियां खाली हो गई हैं। इससे कालीन नगरी में डीएपी का संकट गहरा गया है। जिससे किसानों को निजी दुकानों से डीएपी लेना पड़ रहा है। सहकारिता विभाग का मानना है कि दीपावली तक एक हजार एमटी डीएपी आ जाएगी।
जिले में 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोआई होनी है। धान की कटाई संग खेत की नमी को देखते हुए किसान गेहूं की बुआई भी शुरू कर दिए हैं। जहां नमी नहीं है वहां पलेवा किया जा रहा है। बोआई से पूर्व ही घरों में डीएपी को रखने लगे हैं। शुरूआत में ही डीएपी की मांग इतनी बढ़ गई कि समितियों पर कुछ दिन पूर्व आई एक हजार एमटी डीएपी खत्म हो गई। 52 सहकारी समितियों पर अब एक बोरी भी डीएपी नहीं बची है। जिससे समितियों के सचिव ताला लगाकर खाद आने का इंतजार कर रहे हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने सहकारी समिति अभोली, रमईपुर, ज्ञानपुर, चकवां, गोपीगंज का जायजा लिया। सभी केंद्रों पर ताला लटका मिला। बताया गया कि डीएपी ही नहीं है, इसलिए बंद है।
इस संबंध में एआर सहकारिता राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि शुरूआत में 3700 एमटी डीएपी की मांग की गई। जिसमें एक हजार मिली थी वह खत्म हो गई। अब 2700 एमटी डीएपी की डिमांड भेजी गई है। दीपावली तक आने की उम्मीद है। बताते चलें कि जिले में रबी सीजन के लिए करीब सात हजार एमटी डीएपी की जरूरत पड़ती है। सहकारी समितियों के अलावा इफको केंद्र एवं निजी दुकानों से किसान उसकी भरपाई करते हैं।
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किसानों की समस्या के लिए कंट्रोल रूम बना
ज्ञानपुर। रबी सीजन में किसानों की समस्या के लिए घरांव स्थित कार्यालय पर सोमवार को कंट्रोल रूम की स्थापना की गई। जहां किसान फोन कर अपनी समस्या रख सकेंगे। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि खाद और बीज से जुड़ी समस्या के लिए किसान प्रतिदिन सुबह 10 से शाम पांच बजे तक मोबाइल नंबर 7800341675 पर फोन कर सकेंगे। कनिष्ठ सहायक राम प्रताप यादव को प्रभारी बनाया गया है।