ऊंज। चुनावी महासमर को संपन्न होने में मात्र 11 दिन और शेष रह जाने को लेकर जहां प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन तेज होती जा रही है, लेकिन मतदाताओं के उत्साह पर प्रत्याशी पानी फेरने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दिन में कड़ी धूप के बीच असहनीय हो चली गर्मी में महासमर का माहौल रफ्तार न पकड़ जाने से चर्चाओं का भी बाजार दिनोंदिन गरम होता जा रहा है।
मतदाताओं की मानें तो पहले की अपेक्षा चुनाव को लेकर जो माहौल नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा था, वह अब नहीं रह गया है। मैदान में उतरे नए चेहरों को लेकर मची ऊहापोह लोगों में पच नहीं रही है। स्थानीय प्रत्याशी भी बिना मेहनत के मिल रही सौगात को हरसंभव भुनाने का दंभ भरना भी हानिकारक ही साबित हो सकता है। चट्टी हो या तिराहा, सार्वजनिक स्थल, रेलवे स्टेशन हर जगह चुनावी माहौल के रफ्तार न पकड़ पाने की चर्चा जन-जन में आतुर होकर ठहाके तक ही सीमित हो रही है। कभी चुनाव जीतने के लिए पगडंडियों पर समर्थकों के साथ चलने वाले आज काफिलों में शामिल लग्जरी वाहन भी -धूप और गर्मी के आगे सड़क क्या गांव-गिरांव की गलियों में दूर-दूर तक न दिखाई देना बाहुबल और धनबल को बढ़ावा देने जैसी साबित हो चुकी है। हालांकि सुबह-शाम समर्थकों के साथ झलक दिखाने वाले अकड़पन के आगे मतदाताओं को तवज्जों देना भी उचित नहीं समझते। चंद लोगों के इशारे पर 78 भदोही लोकसभा के भारीभरकम क्षेत्र से वोट हासिल कर पाना मुश्किल ही नजर आ रहा। प्रबुद्घ वर्ग और समाज सेवकों का आज भी यह मानना है कि मतदाता और प्रत्याशी एक-दूसरे के पूरक हैं। जब तक दोनों के स्वभाव में मानवता नहीं पैदा होगी, तब तक जनसमर्थन को हासिल कर पाना मुमकिन मान रहे हैं। वैसे भी गर्मी और धूप को दरकिनार कर दो माह के समर में दुकान चलाने वालों की चलती-फिरती गाड़ी चलती अवश्य रफ्तार लेने लगी है।