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असमंजश में

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ज्ञानपुर। भारत साक्षर मिशन के तहत संचालित लोक शिक्षा केंद्रों पर तैनात शिक्षा प्रेरकों को 27 माह से मानदेय नहीं मिला। ऐसे में उनके सामने आर्थिक तंगी खड़ी हो गई है। आर्थिक संकट से जूझ रहे 100 से अधिक शिक्षा प्रेरकों ने तो दूसरी नौकरी ढ़ूंढ़ ली है।
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किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए 15 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को अक्षर ज्ञान कराकर साक्षर करने और देश की साक्षरता दर बढ़ाने के लिए संचालित भारत साक्षर मिशन के तहत जिले में 2012 में 481 ग्राम पंचायतों में 962 शिक्षा प्रेरक तैनात किए गए। प्रेरकों को दो हजार रुपये प्रति माह मानदेय तय किया गया। शुरुआती दो से तीन साल तक स्थिति ठीक रही, लेकिन 2015 के बाद से मानदेय की लेटलतीफी शुरू हुई। दो साल से तो मानदेय मिल ही नहीं रहा है। मानदेय नहीं मिलने से प्रेरकों के समक्ष आर्थिक तंगी खड़ी हो गई है। वहीं मार्च 2018 के बाद उनकी नौकरी भी नवीनीकरण नहीं हो सका। इससे नौकरी को लेकर भी प्रेरक असमंजश की स्थिति में है। शिक्षा विभाग की ओर से भी प्रेरकों को कुछ खुलकर नहीं कहा जा रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि मानदेय के लिए कई बार पत्र लिखा गया। 2018 मार्च के बाद से ही कोई दिशा-निर्देश नहीं आया।
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