जंगीगंज। काशी प्रयाग के मध्य सेमराध स्थित गंगा तट पर आयोजित कल्पवास में शुक्रवार को प्रवचन करते हुए साध्वी डॉ. साधना त्रिपाठी ने रामजन्म के प्रसंग की कथा सुनाई। कहा कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए म हायज्ञ का आयोजन किया, जिसमें समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों और वेदविज्ञ प्रकांड पंडितों को बुलावा भेजा।
सेमराध मेें आयोजित कल्पवास मेले में साध्वी साधना त्रिपाठी ने राम के जन्म प्रसंग पर श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। कहा कि राजा दशरथ ने पुत्र पाप्ति के लिए विशाल महायज्ञ का आयोजन किया था। इस दौरान महाराज के आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिणी सेना के साथ छोड़ा गया। कहा कि राजा दशरथ ने अपने गुरु वशिष्ठ और मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जमाता ऋंग ऋषि समेत समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिए बुलावा भेजा। यज्ञ के दौरान प्राप्त प्रसाद को राजा दशरथ ने अपने तीनों रानियों को दिया। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानियों ने गर्भधारण किया। कहा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में जब सभी ग्रह अपने अपने उच्च स्थानों पर विराजमान थे, तभी राजा दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से भगवान राम, कैकेयी के गर्भ से भरत और सुमित्रा के गर्भ से दो पुत्र लक्ष्मन और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। अयोध्या में जन्में चारों बालक नील वर्ण, चुंबकीय आकर्षण वाले, अत्यन्त तेजोमय, परम कान्तिवान और अत्यंत सुंदर था।