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कौम की बेहतरी के लिए शिक्षित हो समाज

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भदोही। कौम की बेहतरी के लिए सबको शिक्षा से जोड़ना होगा। आज समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा ही है। मां-बाप कौम के बच्चों को स्कूल भेजें और जहां तक हो सके उन्हें पढ़ाने में कोई कसर न छोड़ें। ये बातें बीती रात मोहल्ला गौरियाना में हुए जश्ने गौसुलवरा कांफ्रेंस में मौ. गुलाम रसूल बलियावी ने कहीं।
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मौलाना ने कहा कि दुनियां तरक्की के राह पर है। हमारा मुल्क भी हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है। सामाजिक सरोकार बदल रहे हैं। आज शिक्षा की उपयोगिता बढ़ गई है। अपने समाज के अधिसंख्य लोग शिक्षित होकर ऊंचे ओहदों पर हैं। ऐसे में यदि अपने पेट काटकर भी बच्चों को पढ़ाना पड़े तो पढ़ाना चाहिए। कांफ्रेंस में यह भी समझाया गया कि पढ़ने से मुराद यह नहीं है कि लोग अपने दीन की पढ़ाई छोड़ दें। रोजा, नमाज, जकात इस्लाम का अहम स्तंभ है। उन्हें पूरा करना भी हमारी अहम जिम्मेदारी है। कहा कि इतना कर अगर हमने अल्लाह को राजी कर लिया तो समझो बेड़ा पार हो गया।
मौलाना ने कहा कि गौसे आजम न सिर्फ अल्लाह के महबूब बंदे बने बल्कि उन्हें वलियों के सरदार का मर्तबा है। उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज, निजामुद्दीन औलिया, हजरत वारिस पाक जैसी हस्तियों का भी हवाला दिया। कहा ये लोग कि ईमानदारी, सच्चाई और इबादत के बल पर अल्लाह के बेहद करीबियों में शुमार हो गए। कांफ्रेंस में नमाज कायम करने पर जोर दिया गया। हजरत अल्लामा सैयद इकबाल हसन हसनी और ऐनुल बशर ने भी सैयदना गौस पाक पर रोशनी डाली। आगाज कुरआन की तिलावत से हुआ। शायर सैय्यद सदफ सईद, शाहिद रजा, मो.नजीर आदि ने नाते पाक का नजराना पेश किया। सदारत मौ.फैसल अशरफी ने निजामत कारी आलम ने किया। हाफिज अशफाक, हाफिज तबरेज, हाफिज अनस, जहीर खां, मेराज खां, सैयद शम्स, महमूद खां, जुनेद खां आदि थे।
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