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ट्रेनों के रद होने से डग्गामार सवारी वाहनों की चांदी

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भदोही। जनता एक्सप्रेस के बाद पैसेंजर ट्रेन के भी निरस्त होने से भदोही-वाराणसी के बीच निजी बस और जीप संचालकों की चांदी हो गई है। सुबह वाराणसी से भदोही आने वाले की खासी संख्या होती है। पैसेंजर ट्रेन वाराणसी से छह बजे चलती थी, जबकि जनता एक्सप्रेस 8.25 बजे रवाना होती थी। भारी संख्या में यात्री इन्हीं दोनो ट्रेनों पर आश्रित थे। रेलयात्रियों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब जनता एक्सप्रेस के साथ साथ पैसेंजर ट्रेन को भी रद किया गया।
जानकारी हो कि भदोही और जिला मुख्यालय ज्ञानपुर के निजी प्रतिष्ठानों और राजकीय कार्यालयों में हजारों लोग काम करते हैं, जिन्हें सुबह वाराणसी से भदोही आना होता है। कोहरे में जनता एक्सप्रेस को रद कर दिया जाता है लोगों को इसकी जानकारी तो थी, लेकिन पैसेंजर ट्रेन भी रद किया जाएगा, इसकी आशा नहीं थी। भदोही-वाराणसी रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राम अवतार शर्मा ने कहा कि पैसेंजर ट्रेन को भी रद करने का फैसला रेलवे की अदूरदर्शिता है। अधिकारियों ने दैनिक यात्रियों की समस्या को नहीं समझा और पैसेंजर को रद कर दिया। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हर वर्ष जनता एक्सप्रेस के रद होने पर पैसेंजर ट्रेन ही विकल्प बनती थी। जनता एक्सप्रेस के समय उसका परिचालन कर लोगों की समस्या दूर की जाती थी।
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इस बीच इस निर्णय से वाराणसी से सुरियावां तक निजी डग्गामार जीप और निजी बस सेवा की चांदी हो गई है। जिन्हें काम करना है उन्हें कैसे भी वाराणसी से भदोही पहुंचना है। इसलिए लोग जीप और बस का सहारा ले रहे हैं। लोगों ने रेलराज्य मंत्री मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप कर पैसेेंजर ट्रेन को बहाल कराकर उसे जनता एक्सप्रेस के समय चलाने की मांग की है।
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नौ की जगह 15 को ठूंसते हैं जीप में
भदोही। भदोही के बीच इंदिरा मिल चौराहे से वाराणसी के पॉल्ट्री फॉर्म के बीच जीप सेवा हर घंटे मिलती है, लेकिन यह न केवल खर्चीला पड़ता है बल्कि खतरनाक भी होता है। संदीप चौरसिया अनिल यादव ने बताया कि जीप में नौ की जगह होती है लेकिन उसमे 15 लोगों को ठूंस कर बैठाया जाता है। चालक आधी सीट पर बैठकर जीप चलाता है। इसके चलते इस रूट पर आए दिन दुर्घटनाएं भी हुईं हैं जिसमे मौते हुई हैं, लेकिन परिवहन विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। लोगों ने यह भी कहा कि ट्रेन रद होने से उनकी एमएसटी बेकार हो रही है जबकि जीप से एक बार आने जाने में 80 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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