ज्ञानपुर। तहसील परिसर में सोमवार को अधिवक्ता और लेखपालों के बीच हुई मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को लेखपालों ने तहसील में धरना देकर विरोध किया, जबकि अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर तहसील में हंगामा और प्रदर्शन किया। डीएम के आश्वासन पर अधिवक्ता शांत हुए।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के बैनर तले तहसील परिसर में बड़ी संख्या में लेखपाल धरने पर बैठ गए। डीएम के सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि अभिलेखों में हेराफेरी करने के लिए लेखपालों पर दबाव बनाया गया, जिसे न करने पर गाली-गलौज किया। चार दिसंबर को सुबह 11 बजे 200 से अधिक की संख्या में अधिवक्ता तहसील में आए और तहसीलदार न्यायालय के सामने रखे कूलर और बेंच को ध्वस्त कर दिया। पुलिस बल के बचाव करने पर गाली गलौज देकर चले गए। लेखपालों ने कहा कि अधिवक्ताओं की धमकी से वह भयभीत हैं। मामले में उचित कार्रवाई की जाए। मौके पर रमाशंकर यादव, दिनेश बहादुर सिंह, राजेश, रामवृक्ष भारतीय, अमरेश दूबे, अजय श्रीवास्तव, अजीत श्रीवास्तव, बेलाल अहमद, नीती शुक्ल, बिंदू सरोज, अवधेश तिवारी आदि रहे। वहीं दूसरी ओर प्रकरण को लेकर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी मिश्र और महासचिव विमलेश दूबे के नेतृत्व में लामबंद 100 से अधिवक्ता जुलूस निकालकर तहसील पहुंचे। नारेबाजी करते हुए दोनों लेखपाल और नकल नवीस की गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने हंगामा किया, हालांकि डीएम के आश्वासन पर सभी शांत हुए। इस मौके पर तेज बहादुर यादव, पीके तिवारी, रवि श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव, विनोद सोनकर, विकास सिंह, संतोष मालवीय आदि रहे। बताते चलें कि सोमवार को हुए मारपीट में लेखपालों और नकल नवीस की तहरीर पर अधिवक्ता के खिलाफ एससीएसटी, सरकारी काम में बांधा पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया गया।