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आयुष्मान योजना: 92 हजार परिवार, 2

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ज्ञानपुर। जागरूकता के अभाव में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना जिले में परवानन नहीं चढ़ पा रही है। जिले में 92 हजार परिवारों को इस योजना का लाभ देने के लिए चिह्नित किया गया है। योजना लागू होने के बाद पहले तिमाही में अब तक मात्र 28 लोग ही इसका लाभ प्राप्त कर सके हैं। इसकी वजह आम लोगों को योजना के बारे में विाद जानकारी नहीं होने के साथ ही निजी अस्पतालों की ओर से टालमटोल करना मुख्य वजह है। विभागीय लापरवाही भी योजना का लाभ दिलाने में आड़े आ रही है। अब तक विभाग केवल आठ हजार परिवारों को ही गोल्डन कार्ड वितरित कर पाया है।
आर्थिक परेशानी से समुचित उपचार नहीं कराने से कई लोगों को जान गंवानी पड़ती है। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की। इस योजना में लाभार्थी परिवार के किसी सदस्य की बीमारी में पांच लाख तक का खर्च सरकार उठाएगी। कई महीने की मशक्कत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 92 हजार परिवारों का चयन कर आठ हजार को गोल्डन कार्ड का वितरित किए हैं। करीब तीन महीने के बाद मात्र 28 लोगों को योजना का लाभ मिल सका। उपचार के लिए दो सरकारी और 16 प्राइवेट अस्पतालों को चयनित किया गया है। जिसमे आठ हजार लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किए गए हैं।
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तीन आयुष्मसन मित्रों के ऊपर प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी
आयुष्मान योजना के प्रचार-प्रसार के लिए जिले में केवल दो आयुुष्मान मित्र तैनात किए गए हैं। यही दो आयुुष्मान मित्र जिलेभर में योजना के प्रचार की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। हालांकि आबादी के लिहाज से यह संख्या ऊंट के मुंह में जीरा जैसा हैं। यही वजह है कि योजना के पहले तीन महीने में अब तक सिर्फ 28 मरीजों का उपचार हो पाया हैं।

निजी अस्पताल नहीं ले रहे रुचि
विभागीय सूत्रों की माने तो प्राइवेट अस्पताल संचालक इस योजना के तहत उपचार में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह यह है कि उन्हें उपचार का पैसा इंश्योरेंस कंपनी की ओर से मिलता है। यह भुगतान बिल देने के बाद ही होगा। अस्पताल संचालकों को लगता है कि बिल भुगतान में काफी विलंब होगा, जिसका असर उनके कामकाज पर पड़ेगा। हालांकि इस बारे में कोई खुलकर कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। उनका कहना है कि उनके पास अब तक ऐसे मरीज ही नहीं पहुंचे हैं। वहीं वहीं सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत उपचार की बेहतर व्यवस्था नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर सीएमओ से प्रतिदिन रिपोर्ट मांगी जा रही है, कि योजना के तहत कितने मरीजों का उपचार किया जा चुका है।


योजना को लेकर प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। जिससे लोगों में योजना के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी इसके बारे में डाक्टर जानकारी देने का काम कर रहे हैं। निजी अस्पतालों से भी रिपोर्ट मांगी जा रही है। उनसे कहा गया है कि वह किसी भी ऐसे मरीज को लौटाएं नहीं जिनके पास गोल्डन कार्ड है। - डा. एसएन सहाय, प्रभारी सीएमओ भदोही
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जिला अस्पताल में अब तक वार्ड नहीं
ज्ञानपुर। आयुष्मान योजना को लेकर स्वास्थ्य महकमा कितना संजीदा है इसकी बानगी जिला अस्पताल में देखने को मिलेगी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के लिए महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में अब तक वार्ड नहीं बन सका है। जिससे साधारण मरीज भी इस योजना के तहत इलाज कराने से दूूर भाग रहे हैं। योजना के तहत गंभीर मरीज चिकित्सकों के खोजे नहीं मिल रहे है।
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