ज्ञानपुर। मानसूनी बारिश शुरू होने वाली है। 510 प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। इस कारण पक्के घर का सपना देखने वाले परिवारों को आषाढ़-सावन की रातें छप्परों से टपकती पानी की बूंदों के बीच गुजारनी पड़ेगी। 2022 के बाद स्वीकृत आवास निर्माण की प्रगति तो ठीक है, लेकिन पूर्व में आवंटित आवास प्रधान और सचिवों की उदासीनता के कारण अधूरे पड़े हैं।
केंद्र सरकार की ओर से गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए साल 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5981, 2017-18 में 4560 और 2018-19 में 2248, 2019-20 में 6100 समेत 2023 तक कुल 38 हजार स्वीकृत हुए। साल दर साल आवासों को समय से पूरा कराने के लिए शासन एवं प्रशासन की तरफ से अल्टीमेटम जारी हुए, लेकिन बड़ी संख्या में आवास पूरे नहीं हो सके। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 2023 में स्वीकृत 411 आवासों में सभी बन चुके हैं। 2022-23 में 12 हजार आवासों में 267 अधूरे हैं, जबकि 2020-21 में 150, 2019-20 में 100 से अधिक आवास अब तक नहीं बन सके। प्रधान और सेक्रेटरी के साथ बैंकों की उदासीनता से भी लाभार्थियों के आवास पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में छप्पर या कच्चे घरों को तोड़कर प्रधानमंत्री आवास बना रहे लाभार्थियों को बारिश की रात गुजारने में मुश्किलें आएंगी।
ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में सचिवों और प्रधानों की मनमानी की सामने आई है। जांच के बाद कई प्रधानों की कुर्सी चली गई तो कई सचिव भी निलंबित हो गए। ग्रामीण अंचलों में ऐसे लोगों को सूची में शामिल कर दिया गया, जिन्हें पहले लोहिया और इंदिरा आवास का लाभ मिल चुका था। शिकायत हुई तो जांच कराई गई। मामला सही मिला, तो कार्रवाई हुई।
ज्ञानपुर। जिले में वैसे तो गिने-चुने गांव को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर गांवों में एक या दो आवास अधूरे हैं, लेकिन कुछ ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां पांच से छह आवास अधूरे हैं। भदोही ब्लॉक के पिपरिस, जमुनीपुर अठगवां, डीघ ब्लॉक के डीघ, भदोही के दरूनहां समेत 15 से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां अधूरे आवासों की संख्या अधिक है।
प्रधानमंत्री आवास की समीक्षा शासन स्तर से हो रही है। 90 फीसदी से अधिक आवास पूरे हो चुके हैं। 38 हजार 719 आवास में सिर्फ 510 अधूरे हैं। इसमें कुछ विवाद के कारण पूरे नहीं हुए तो कुछ लाभार्थी पैसा लेकर गायब हो गए हैं। ऐसे लोगों पर सख्ती की जाएगी। - आदित्य कुमार, परियोजना निदेशक।