देश के नाम संदेश में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद किए जाने की घोषणा से आम जनमानस में सनसनी दौड़ गई है। जैसे ही नोटों को बंद करने की घोषणा हुई खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। और जिसने भी सुना वह टीवी से जाकर चिपक गया। देश के नाम जब तक पीएम का संदेश चला लोगों ने खाना पीना छोड़ कर उनके संदेश को सुना। उनका संदेश चलने के दौरान ही नोटों के ना चलने को लेकर प्रतिक्रिया शुरू हो गई थी।
खबर आते ही सगे संबंधियों, मित्रों के आपस में फोन घनघनाने लगे। हर तरफ से लोग एक दूसरे को यह खबर बताने को आतुर दिखे। मजदूर, ठेला चालकों से लेकर कालीन निर्यातकों, व्यापारियों में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। कहा जाने लगा कि सरकार ने यह निर्णय बेहद जल्दबाजी में कर दिया है। अधिकतर लोगों को मंगलवार की रात से ही नोटों का प्रचलन बंद करने पर प्रतिक्रिया हुई है। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के मानद सचिव. पियूष बरनवाल ने कहा कि नोटों का संचालन ओवरनाइट बंद करने का फैसला ठीक नहीं है। काला धन समाप्त करने के लिए यह निर्णय ठीक हो सकता है लेकिन ओवर नाइट इस तरह से नोटों का संचालन बंद करने से एक बड़े तबके को भारी परेशानी होगी विशेषरुप से कालीन उद्योग से जुड़े लाखो मजदूरों और बुनकरों के लिए जो गांव गिराव में रहते हैं और बैंकिंग लेनदेन से काफी दूर हैं। प्रमुख कालीन निर्यातक हाजी अब्दुल हादी अंसारी ने कहा कि यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। हालांकि यह भी कहा कि काला धन से पार पाने के लिए यह निर्णय सही हो सकता है लेकिन कुल मिलाकर सरकार की नीयत साफ होनी चािहहिए।