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480 करोड़ बकाया है बिजली का बिल  

Mon, 23 May 2016 08:01 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
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 बिजली उपभोक्ता और सरकारी कार्यालय बिजली विभाग का बकाया जमा कर दें तो जिले का अंधियारा मिट सकता है। जिले के सरकारी कार्यालयों और उपभोक्ताओं पर बिजली विभाग का 480 करोड़ रुपये बकाया है। कहा जा रहा है कि बकाया रकम इतनी है कि इससे 132 केवीए के दो उपकेंद्र सहित हर गांव को दो-दो ट्रांसफार्मर मुहैया कराए जा सकते हैं। साथ ही जर्जर लटकते तारों की स्थिति भी बदल जा सकती है। 
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ग्रामीण और नगरीय इलाकों में 20 और 24 घंटे बिजली की मांग करने वाले लोग बिजली बिल जमा करने में तत्परता नहीं दिखाते। जिले के ज्ञानपुर और भदोही उपखंड के 66 हजार उपभोक्ताओं पर बिजली विभाग का 450 करोड़ रुपये बिल बकाया है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो ज्ञानपुर उपखंड के 33 हजार 995 बत्ती, पंखा के घरेलू उपभोक्ताओं पर 199.18 करोड़ जबकि पंपिंग सेट के 3786 उपभोक्ताओं पर 26 करोड़ रुपये बिल बकाया है। इसमें 20 हजार से अधिक का बिल न जमा करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 15 हजार से अधिक है। इसी तरह भदोही डिवीजन में करीब 32 हजार उपभोक्ताओं पर 225 करोड़ बकाया है। इसमें बत्ती, पंखा के अलावा बड़ी फर्में भी शामिल हैं। सरकारी दफ्तरों पर भी विभाग का करीब 30 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। इसमें सर्वाधिक बकाएदारी बेसिक शिक्षा विभाग पर करीब सात करोड़ है। जिला मुख्यालय, जिला कारागार, पुलिस लाइन सहित अन्य विभागों पर भी बिजली बिल बकाया है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो सरकारी कार्यालयों और उपभोक्ताओं पर बकाया 480 करोड़ मिल जाए तो विभाग का कायाकल्प हो जाएगा। 
इस रकम से जनपद में दो बड़े उपकेंद्र स्थापित करने के साथ ही 561 ग्रामसभाओं में दो-दो नए ट्रांसफार्मर और जर्जर तार को भी बदला जा सकता है। 13 एमवीए के लगभग 450 उपकेंद्रों की स्थापना की जा सकती है। दो ट्रांसफार्मर वाले 13 एमवीए के उपकेंद्र की लागत एक करोड़ के करीब होती है। अधिशासी अभियंता अवधेश पासवान ने कहा कि बकाया वसूली के लिए अभियान चलाया जाता है। सरकारी छूट मिलने पर कुछ लोग बकाया जमा करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग बकाया माफी के इंतजार में पैसा नहीं जमा करते। 
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 बिजली विभाग की तरह सरकारी राजस्व की वसूली में जल निगम भी फिसड्डी है। जनपद में स्थापित 25 से अधिक पेयजल योजना समूहों का उपभोक्ताओं पर 50 लाख से अधिक का बकाया है। प्रत्येक वर्ष लक्ष्य के आसपास भी विभाग नहीं पहुंच पाता। वर्ष 2015 में नौ लाख वसूली का लक्ष्य तय था, जबकि वसूली तीन लाख हो सकी। 2016 में यह लक्ष्य 23 लाख पहुंच गया है। हर साल तीन से लेकर सात लाख की बकादारी बढ़ती गई। गत एक दशक में यह आंकड़ा 50 लाख तक पहुंच गया। अधिशासी अभियंता जल निगम एसएन तिवारी ने कहा कि विभागीय कर्मचारी वसूली करते हैं, लेकिन अभी काफी बकाया है।
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