केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे गांवों को ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्त बनाने में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की गई है। 50 फीसदी से भी कम शौचालय बनने के बाद भी ग्राम प्रधानों ने खेल कर दिया। गांवों में बैठक कर इन्हें कागजों में ही ओडीएफ बना दिया गया। पंचायत की रिपोर्ट को प्रशासन ने बिना जांच किए ही शासन को भेज दिया। उक्त प्रस्ताव में गंगा से सटे 46 गांवों को कागज में ओडीएफ बना दिया गया है। जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार प्रथम चरण में गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने की मुहिम में जुटी है। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाया जा रहा है। जिले के औराई, डीघ और ज्ञानपुर ब्लॉक में गंगा से सटे 46 गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें नारेपार, बारीपुर, सेमराध, फुलवरिया, नगरदह, इब्राहिमपुर, बदरी, डीघ, बनकट, महमदपुर, दानीपट्टी, कलिंजरा, कठारी आदि गांव शामिल हैं। गांवों को ओडीएफ बनाने की कवायद गत दो साल से चल रही है, लेकिन अब तक वह पूर्ण नहीं हो सका। चिन्हित गांवों में करीब 700 शौचालय बनने थे, जिसमें 200 से कुछ अधिक शौचालय ही बन सके हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना होने से शौचालय निर्माण के लिए पैसे भी मिले, लेकिन ग्राम प्रधानों ने बिना शौचालय बने ही गांवों को ओडीएफ दिखा दिया। प्रधानों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को प्रशासनिक स्तर से शासन को भेज दिया गया। मालूम हो कि शासन की ओर से 30 जून तक गंगा से सटे गांवों को ओडीएफ बनाने की डेडलाइन निर्धारित की गई थी। प्रशासनिक अफसरों ने कार्रवाई के डर से कागजी रिपोर्ट को ही आगे बढ़ा दिया।