जनपद में बाढ़ से निपटने के लिए जलनिगम ने 4.5 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। इसके जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलनिकासी, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाएगी। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अगर सब ठीक रहा तो जून से काम शुरू होने की उम्मीद है।
गंगा किनारे बसा जनपद का कोनिया बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। सबसे अधिक कटान प्रभावित गांव छेछुआ, भुर्रा गांव है, जहां के किसानों की सैकडों बीघे कृषि भूमि गंगा में समाहित हो चुकी है। इसी तरह बनकट, चकिया, बारीपुर, इटहरा, मवैया, हरिरामपुर, धनतुलसी, डीघ आदि गंगा तटीय गांवों में कटान एक भीषण समस्या का रूप ले रही है। यही स्थिति सुरियावां, मोढ़ में वरुणा नदी से सटे गांवों की है। गहराई कम होने से वरुणा नदी में बारिश का पानी कई गावों में फैल जाता है।
बाढ़ की विभीषिका को रोकने के लिए इस साल जल निगम ने साढ़े चार करोड़ की कार्ययोजना तैयार की है। बाढ़ के मद्देनजर विभागीय स्तर से प्रस्ताव में जल निकासी, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने, पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष बोट आदि की व्यवस्था की गई है। क्षेत्र के विधान चंद दुबे और कला तुलसी के महेश पाण्डेय ने कहा कि बाढ़ और कटान से गरीब किसान बर्बाद हो रहे है। लेकिन, समस्या निदान के लिए सरकारे कोई भी कदम नही उठा रही है।
छेछुआ के शिव सागर यादव ने कहा कि बाढ़ से किसानों की मेहनत हर साल चौपट हो जाती है। प्रशासन और शासन की ओर से ठोस पहल हो। सीताराम चौधरी ने कहा कि हर साल अफसर आश्वासन देते हैं, लेकिन बाढ़ से बचाव के लिए कुछ नहीं होता।