ज्ञानपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। विभागीय जांच में 450 ऐसे लाभार्थी सामने आए हैं, जिनके पास एक धूर खेत नहीं है, लेकिन वे योजना की पांच-पांच किस्तें प्राप्त कर लिए हैं। विभाग ने वेबसाइट से उन्हें डिलीट कर रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी है। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई। लोकसभा चुनाव के कारण शुरुआती दौर में आनन-फानन में आवेदन जमा किए गए। पहले चरण में एक लाख 20 हजार किसानों ने आवेदन किया। 90 हजार से अधिक लाभार्थियों के खाते में दो-दो हजार की पहली किस्त भेजी गई। दूसरी, तीसरी और चौथी किस्त आने के बाद जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर कृषि दफ्तर में शिकायतें आनी शुरू हुईं।
शासन की गाइडलाइन मिलने पर कृषि विभाग की ओर से जांच शुरू की गई, जिसमें 450 ऐसे लाभार्थी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेते मिले, जिनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है। राजस्व कर्मियों और कृषि विभाग के कर्मियों से तालमेल बनाकर आवेदन कर सभी योजना का लाभ ले रहे थे।
मामला सामने आने पर विभाग की ओर से ऐसे लाभार्थियों का नाम सूची से डिलीट किया गया, लेकिन तब तक प्रत्येक को दो-दो हजार की पांच किस्त यानी 10 हजार सरकार को चपत लगा चुके थे। जिले में पंजीकृृत एक लाख 87 हजार किसानों की बजाए अब तक योजना के लिए एक लाख 91 हजार लोगों ने पंजीयन कराया है। एक लाख 54 हजार किसानों को योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि 25 से 35 हजार किसान तकनीकी खामियों के कारण चक्कर लगा रहे हैं। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि जांच में 450 ऐसे लाभार्थी मिले हैं, जिनके पास जमीन नहीं थी। उन्हें विभागीय सूची से हटाया जा रहा है। सभी को रिकवरी नोटिस भेजा जा रहा है।
अभोली विकास खंड के सदौपुर गांव निवासी त्रिपुरारी शुक्ला ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर किसान सम्मान निधि में धांधली का आरोप लगाया है। कहा कि गांव के तीन से चार व्यक्ति बिना जमीन के योजना का लाभ ले रहे हैं। डीएम ने अपर एसडीएम को जांच कर आख्या देने का निर्देश दिया।